प्राकृतिक वसा विनाशकों के लिए एक चिकित्सक की व्यापक मार्गदर्शिका
विश्व में 2 अरब से अधिक व्यक्ति मोटे हैं अथवा उनका वज़न आवश्यकता से अधिक है। इसीलिए, इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि मानो हर कोई वसा जलाने तथा वज़न कम करने की सर्वोत्तम पद्धतियॉं ढूंढता रहता है।
यहॉं तक कि 2020 में भी, पारंपरिक पद्धति- एक स्वस्थ आहार तथा जीवनशैली- एक प्रभावी वसा नाश रणनीति का मुख्य आधार बनी हुई है। अपितु इस प्रक्रिया की गति बढ़ाने के लिए आप प्राकृतिक पूरक तत्त्वों का उपयोग कर सकते हैं।
इन पूरक तत्त्वों को प्राकृतिक वसा विनाशकों के रूप में जाना जाता है और यह पूरक तत्त्व आपके द्वारा प्रतिदिन जलाई जानेवाली कैलॉरी की गति को बढ़ा कर आपकी आहार व व्यायाम संरचना की प्रभाविता बढ़ा सकते हैं, जिससे समय के साथ निरंतर रूप से आपके शरीर का वज़न घटता रहे।
वसा विनाशक कैसे कार्य करते हैं?
ऐसे पूरक तत्त्व जिन्हें वसा विनाशक कहा जाता है वे वसा चयापचय का संचालन करते हैं, जिसका अर्थ है ऊर्जा निर्मित करने के लिए आहार के वसा का विभाजन। वसा विनाशक वज़न की कमी बढ़ाने, वसा के अवशोषण को रोकने, वसा के व्यायाम के समय ऊर्जा के रूप में परिणत होने को गति देने तथा वसा चयापचय को समर्थन करने के लिए शरीर में दीर्घकालिक समानुकूलनों को निर्माण करने के द्वारा भी अपने प्रभाव दिखा सकते हैं।
“वसा विनाशक” यह संज्ञा वास्तव में गलत है, क्योंकि वसा का ऑक्सीकरण होता है, न कि वह जलता है। वसा को प्रभावी रूप से विभाजित करने के लिए, शरीर को ऑक्सीज़न की आवश्यकता है। ऑक्सीकरण वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा शरीर वसा को ऊर्जा के रूप में परिणत करने के लिए ऑक्सीज़न का उपयोग करता है।
कुछ सामान्य प्राकृतिक वसा विनाशक कौन-से हैं?
कॅफ़ीन
कॅफ़ीन केंद्रीय मज्जा प्रणाली का एक संप्रेरक है, जो व्यक्ति के चयापचय को उत्स्फूर्त कर सकता है। शरीर की चयापचय दर को बढ़ाना उसके लिए रक्त में कैटेकोलैमीन की संख्या बढ़ाने द्वारा संभव होता है। यह रसायन वसा कोशिकाओं में वसा के भण्डारित स्थान से उसे ऊतकों तक पहुंचाते हैं, जहॉं उसका ऑक्सीकरण(ऊर्जा के रूप में परिवर्तन) होता है। अतः, आधारभूत चयापचय दर बढ़ाने द्वारा- जिस ऊर्जा का उपयोग आराम के दौरान शरीर करता है- कॅफ़ीन वसा नाश होने की गति को बढ़ा सकता है।
सतर्कता: कॅफ़ीन के संभावित सहप्रभावों में झटके, चिंता तथा हलचल शामिल हैं। 15 mg/किलो की मात्रा दी जाए, तो उसके चक्कर, उलटी, तेज़ हृदयगति, दौरे तथा मस्तिष्क एडेमा जैसे विषैले प्रभाव हो सकते हैं। अन्य संप्रेरकों के साथ समायोजन में उपयोग किए जाने पर, कॅफ़ीन इन विपरीत परिस्थितियों को और ख़राब बना सकता है।
कैप्साइचिन
कैप्साइचिन कैप्साइचिनॉयड नामक यौगिकों के वर्ग का सबसे सामान्य स्वरूप है। ये यौगिक शिमला मिर्च(कैप्सिकम एन्यूम प्रजातियों) में पाए जाते हैं, जिनके कारण खाते समय हमें गर्मी का एहसास होता है। कैप्साइचिन वज़न के प्रबंधन में उपयोगी हो सकता है, क्योंकि उसमें भूख कम करने की, पेट भरे होने की संवेदना बढ़ाने और खाने के बाद इंसुलिन प्रतिक्रिया कम करने की क्षमता होती है। वह ऊर्जा का व्यय तथा फॅट ऑक्सीकरण बढ़ाकर चयापचय को भी उत्स्फूर्त करता है।
सावधानियॉः पेट व अमाशय के विकार, सेरेम इंसुलिन में वृद्धि तथा उच्च घनता के लिपोप्रोटीन(एचडीएल) कैप्साइचिन के उपयोग के कुछ अवांछित प्रभावों में से हैं। अन्यथा, कैप्साइचिन पूरक तत्त्व के रूप में तौलनिक रूप से सुरक्षित प्रतीत होता है।
कार्टिनिन
कार्टिनिन यौगिक(जैसे एल-कार्टिनिन )लाइज़ीन और मेथियोनिन जैसे एमिनो एसिड्स से बने होते हैं । शरीर कार्टिनिन का उत्पादन करने में सक्षम है, अतः आहार में उसे लेने की आवश्यकता नहीं है। शरीर की अधिकतर कोशिकाओं में कार्टिनिन होता है और वह वसा के परिवहन तथा ऑक्सीकरण में भूमिका निभाता है।
सावधानियॉं: यदि आप कार्टिनिन पूरक तत्त्व प्रतिदिन 4 ग्राम से अधिक न लें, तो वह सामान्य रूप से सुरक्षित होते हैं। कार्टिनिन अधिकतर सहन करने योग्य है, भले उसके कारण चक्कर, उलटी, अतिसार, पेट में मरोड़ तथा शरीर से मछली जैसी दुर्गंध आना- ऐसा हो सकता है। यह दुर्लभ है, किंतु यूरेमिया से ग्रस्त रोगियों में स्नायु का अशक्त होना भी एक सहप्रभाव हो सकता है। दौरे आने के विकारों से ग्रस्त रोगियों में दौरे भी आ सकते हैं, पर वह भी दुर्लभ है।
क्रोमियम
क्रोमियम, अपने त्रिसंयोजक रूप(क्रोमियम ३) में एक आवश्यक ट्रेस खनिज है, जो इंसुलिन के प्रभाव को परिवर्धित करता है। अनुसंधान से पता चला है कि क्रोमियम मॉंसपेशियों का वज़न कम होने पर उन्हें बढ़ा सकता है और वसा का क्षरण होने में सहायता कर सकता है। कोई वयस्क महिला यदि गर्भवती अथवा स्तनपान न करा रही हों, तो उसके लिए क्रोमियम की सूचित मात्रा प्रतिदिन 20–35 mcg है( राष्ट्रीय विज्ञान, अभियांत्रिकी तथा वैद्यकी अकादमियों में वैद्यकी अकादमी के अनुसार)।
सावधानियॉः अनुसंधान से कुछ संभावित सहप्रभाव अवश्य प्रकट हुए हैं, जैसे चक्कर, उलटी, कमज़ोरी, संभोग की इच्छा में कमी, कब्ज़, पतला शौच और यूर्टिकेरिया (हाइव्स)। परंतु कुल मिलाकर, क्रोमियम का त्रिसंयोजक रूप भली-भॉंति सहन करने योग्य है। दूसरी ओर, बहुसंयोजक क्रोमियम विषैला है, और वह आहार या आहार के पूरक तत्त्वों में नहीं पाया जाता।
समन्वयित लिनोलिक एसिड(सीएलए)
समन्वयित लिनोलिक एसिड(सीएलए) एक ओमेगा-6 फॅटी एसिड है, जिसक संश्लेषण मानवीय शरीर द्वारा नहीं किया जा सकता, किंतु वह गोमांस, बकरे के मॉंस तथा दूध उत्पादों के माध्यम से ग्रहण किया जा सकता है। माना जाता है, कि सीएलए शरीर के मॉंसपेशी- वसा अनुपात में सुधार लाता है। सीएलए इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता परिवर्धित कर इस प्रभाव को प्राप्त करता है। इस कारण ग्लूकोज़ और फ़ैटी एसिड वसा के ऊतकों से दूर मॉंसपेशियों की कोशिकाओं में जाते हैं।
सावधानियॉः सीएलए की अधिकतर विपरीत प्रतिक्रियायें मामूली होती हैं तथा सामान्य रूप से इनमें चक्कर, उलटी, जुलाब तथा पेट में असुविधा जैसे पेट व ऑंत के विकार शामिल होते हैं।
गार्सिनिया कैंबोगिया
गार्सिनिया कैंबोगिया एक फलदार पेड़ है, जो एशिया, अफ़्रीका और पॉलिनेशिया द्वीपों में पाया जाता है। इस फल के गूदे और छिलके में हाइड्रोसाइट्रिक एसिड(एचसीए) उच्च स्तर में पाया जाता है। ऐसा देखा गया है कि एचसीए शर्करा के वसा के रूप में परिणत होने को नियंत्रित करता है। यह मस्तिष्क में सेरोटोनिन का उत्सर्जन करने के द्वारा भूख को भी दबा सकता है।
सावधानियॉः गार्सिनिया कैंबोगिया और एचसीए में मामूली सहप्रभावों की संभावना देखी गई है, जैसे कि चक्कर, सरदर्द, पेट और ऑंत की शिकायतें और ऊपरी श्वसनमार्गिका के लक्षण। मेनिया के कुछ प्रकरणों की बात भी सामने आई है, जो शायद सेरोटोनिन के उत्सर्जन पर एचसीए के कार्य से संबंधित हों। मेनिया के लक्षणों में दाह, दबा हुआ स्वर तथा नींद की आवश्यकता में कमी शामिल हैं।
हरी चाय
हरी चाय (और हरी चाय का सार) चयापचय तथा वसा के ऑक्सीकरण को उत्स्फूर्त करने में सहायक हो सकती है। हरी चाय के सक्रिय घटक कैफ़ीन(ऊपर चर्चा किए अनुसार) तथा कैटेचिन शरीर का वज़न कम करने में योगदान दे सकते हैं। एक प्रमुख कैटेचिन एपिगैलोकैटेचिन गैलेट(ईजीसीजी) है, जो एक फ़्लैवोनॉयड है।
कैटेचिन पॉलिफ़ैनॉल हैं, जिनकी गतिविधि एंटीऑक्सिडेंट होती है। अध्ययन से पाया गया है कि वे पेट की वसा को कम करके ट्राइग्लिसराइड के स्तर में वृद्धि कर सकते हैं। एड्रेनैलीन और नॉरैड्रेनलीन का विभाजन करनेवाले एंज़ाइम को नियंत्रित करने के द्वारा, कैटेचिन इन कैटेकॉलामाइन को वसा के परिवहन तथा आधारभूत चयापचय दर बढ़ाने में सहायता करते हैं।
सावधानियॉः पेय के रूप में लिए जाने पर, हरी चाय का कोई भी विपरीत परिणाम नहीं देखा गया है। हालांकि, कैफ़ीन के प्रति संवेदनशील होने पर सावधानी बरतनी चाहिए और कैफ़ीन मुक्त स्वरूप की हरी चाय को प्राथमिकता देनी चाहिए। हरी चाय के सार में वैद्यकीय परीक्षणों में सौम्य से मध्यम सहप्रभाव देखे गए हैं, जैसे चक्कर, कब्ज़, पेट में असुविधा और रक्तचाप में वृद्धि।
इसका प्रमाण बड़ी संख्या में पाया गया है कि हरी चाय के सार के कारण यकृत की क्षति हो सकती है। रजोनिवृत्ति हो चुकी 1,021 महिलाएं, जो प्रतिदिन 12 महीने हरी चाय का सार ग्रहण करती थीं, उनके अध्ययन में देखा गया कि उनके यकृत के एंज़ाइम प्लैसीबो ले रही महिलाओं की तुलना में लक्षणीय रूप से बढ़ गए थे। कुछ महिलाओं में मध्यम या अति गंभीर यकृत कार्य असामान्यतायें देखी गईं।
2008 में, अमरीकी फ़ार्माकोपिया (यूएसपी) ने 34 प्रकरण ब्यौरों और पशु अध्ययनों में हरी चाय के उत्पादों की सुरक्षितता का निरीक्षण किया। यूएसपी ने निर्धारित किया कि हरी चाय उत्पाद लेने से “संभावित रूप से” यकृत की क्षति के 7 प्रकरण तथा 27 प्रकरणों में संभावित योगदान रहा। यूएसपी यह भी सुझाता है कि यकृत के संभावित ख़तरे को न्यूनतम करने के लिए हरी चाय के सार को अन्न के साथ लेना चाहिए, क्योंकि हरी चाय का सार खाली पेट लेने पर समस्याओं की अधिक संभावना पाई गई।
ग्वार गम
ग्वार गम एक घुलनशील रेशा होता है, जो सामान्य “वसा विनाशक” की भॉंति कार्य नहीं करता, बल्कि वज़न कम करने में सहायता कर सकता है। उसे भारतीय सामूहिक दलहन स्यामोप्सिस टेट्रागोनोलोबस से निकाला जाता है। ग्वार गम संतुष्टि बढ़ाकर तथा आहार के बीच अल्पाहार की वारंवारता कम कर भूख को नियंत्रित कर सकती है। प्रकार 2 मधुमेह के रोगियों पर किए अध्ययन से प्रकट हुआ कि नियमित आहार के साथ प्रतिदिन 10 g ग्वार गम लेने से 4 से 6 सप्ताहों के बाद उनकी कमर के व्यास में लक्षणीय कमी आई।
सावधानियॉः संप्रति उपलब्ध पदार्थों (6 महीनों तक प्रतिदिन अधिकतम 30 g) के साथ कुछ सुरक्षा चिंताओं की जानकारी मिली है। संभावित सहप्रभावों में सबसे सामान्य पेट और ऑंत की शिकायतें हैं। इनमें मरोड़ उठने, अतिसार, पेटदर्द, पेट फूलने और अधिक बार शौच होना समाविष्ट है।
प्रोटीन
प्रोटीन को एक प्राकृतिक वसा विनाशक समझा जा सकता है, क्योंकि यह आपके चयापचय को उत्स्फूर्त करने में सहायता करता है। अधिक प्रोटीन के आहार से मॉंसपेशी बनने में आधार मिलता है, विशेष रूप से जब उसके साथ शक्ति प्रशिक्षण किया जाए। मॉंसपेशी चूंकि वसा से अधिक कैलॉरी “जलाती” है, इससे आपकी चयापचय दर में थोड़ा उछाल आ सकता है। प्रोटीन चयापचय भी बढ़ाते है, क्योंकि वसा या कार्बोद पचाने के लिए आवश्यक कैलॉरी से अधिक कैलॉरी प्रोटीन पचाने में उपयोग में आती हैं।
अनुसंधान दर्शाता है कि शरीर के वज़न के प्रति पौण्ड 0.5-1.0 ग्राम कुल प्रोटीन प्रतिदिन लेने से वज़न कम होने में सर्वाधिक लाभ होता है। खिलाड़ी और ऐसे व्यक्ति, जो नियमित रूप से प्रशिक्षण करते हैं, उन्हें अधिक प्रोटीन की आवश्यकता हो सकती है, क्योंकि उनका लक्ष्य अधिक मॉंसपेशियॉं बनाना और उनकी संभाल होता है।
सावधानियॉः बीते समय में ऐसी चिंतायें उभरी थीं कि, उच्च प्रोटीनमय आहार से मूत्र पिण्ड के कार्य तथा अस्थियों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव होस सकते हैं। तथापि, इसका कोई प्रमाण नहीं है कि स्वस्थ व्यक्तियों में अत्यधिक प्रोटीनमय आहार लेने से मूत्र पिण्ड की क्षति होती है। लेकिन, जिन व्यक्तियों को पहले से ही मूत्रपिण्ड की समस्यायें हैं, उन्हें कम प्रोटीन का आहार लेने से लाभ हो सकता है।
योहिंबिन
योहिंबिन एक वनस्पति यौगिक है, जो एक पश्चिमी अफ़्रीकी सहाबहार वृक्ष योहिंबे के तने में पाया जाता है। उसे पुरुषों में यौन विकार के प्राकृतिक समाधन के रूप में मुख्य रूप से उपयोग में लाते आया गया है। इसे वसा नाश करने में सहायक के रूप में प्रस्तावित किया गया है, क्योंकि उसमें रक्त में कैटोकॉलामाइन बढ़ाने की क्षमता होती है। तथापि, वैद्यकीय अध्ययन दिखाते हैं कि योहिंबिन से वज़न कम होता है।
सावधानियॉः योहिंबिन के साथ कई लक्षणीय सुरक्षा चिंताएं पाई गई हैं। प्रतिदिन 20 से 40 mg योहिंबिन लेने से रक्तचाप में थोड़ी वृद्धि की जानकारी मिली है। परंतु 200 mg या उससे अधिक मात्रा से चिंता, सरदर्द, उच्च रक्तचाप, हृदयगति में वृद्धि तथा मृत्यु भी हो सकती है। संभावित सहप्रभाव गंभीर होने के कारण, योहिंबिन केवल वैद्यकीय पर्यवेक्षण में ही लिया जाना चाहिए।
आपको वसा विनाशक किस प्रकार लेने चाहिएं?
यदि आप नियमित व्यायाम योजना के रूप में बाहर की सैर का आनंद उठाते हों, तो प्रातःकाल यह एक प्राकृतिक वसा विनाशक हो सकती है। इससे दिन के प्रारंभ में आपकी चयापचय दर में वृद्धि हो सकती है। यदि आप अपने व्यायाम की क्षमता और सहनशक्ति सुधारना चाहते हों, तो व्यायाम से पूर्व 30 मिनट आपको सैर करनी चाहिए। लेकिन, आपका व्यायाम सत्र रात्रि में होने की अवस्था में सतर्क रहें, क्योंकि सोने के समय एक संप्रेरक वसा विनाशक आपको जगाए रख सकता है।
वसा विनाशकों के संभावित सहप्रभावों की जानकारी सामने आ चुकी होने के कारण, पूरण आरंभ करने से पूर्व स्वास्थ्य देखभाल सेवाप्रदाता की सलाह लेना ही बुद्धिमानी होगी, विशेष रूप से यदि आपको कोई वैद्यकीय विकार हो। वसा विनाशक पूरक तत्त्व कुछ औषधियों के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं, अतः उन्हें भी स्वास्थ्य सलाह के साथ ही लेने का विचार करना चाहिए।
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