इस सेशन के लिए आपकी प्राथमिकता को अपडेट कर दिया गया है. अपने खाते की सेटिंग को स्थायी रूप से बदलने के लिए अगले पेज (मेरा खाता) में जाएँ.
आपको याद दिला दें कि अपनी वरीयता के अनुसार आप किसी भी समय अपना क्षेत्र या अपनी भाषा अगले पेज (मेरा खाता) में अपडेट कर सकते हैं
> beauty2 heart-circle sports-fitness food-nutrition herbs-supplements pageview
हमारी पहुंच की जानकारी देखने के लिए क्लिक करें
}
checkoutarrow

ब्लैक कोहोश: परीक्षण, परंपरा, प्रतिरक्षा का स्वास्थ्य और बहुत कुछ

24,219 देखे जाने की संख्या

anchor-icon सामग्री की तालिका dropdown-icon
anchor-icon सामग्री की तालिका dropdown-icon
Getting your Trinity Audio player ready...

‌‌ब्लैक कोहोश क्या है?

ब्लैक कोहोश सिमिसिफ्यूगा वंश के हर्बल सप्लीमेंट्स का सबसे आम नाम है, जिसकी मोटे तौर पर 17 प्रजातियां हैं. फूलों वाले इस बारहमासी पौधे की विभिन्न प्रजातियां पूरी दुनिया में पाई जा सकती हैं और चिकित्सा में उनके इस्तेमाल का उल्लेख यूरोपीय और एशियाई दोनों औषधि विज्ञान में मिलता है.

पारंपरिक एशियाई चिकित्सा में आमतौर पर सिमिसिफ्यूगा हेयराक्लीफोलिया और सिमिसिफ्यूगा डह्यूरिका इस्तेमाल की जाती है, जबकि यूरोपीय परंपरा में सिमिसिफ्यूगा रेसमोसा की जड़ मानक बन गई है. सिमिसिफ्यूगा हर्बल सप्लीमेंट्स प्राकृतिक रूप से बनने वाले कई ट्राइटर्पीन और पॉलीफेनोल कंपाउंड्स से भरपूर होते हैं. सिमिसिफ्यूगा की विभिन्न किस्मों में फायटोन्यूट्रीएंट कंपाउंड्स के कई अनोखे प्रकार और अनुपात की पहचान की गई है और इन कंपाउंड्स से सुराग मिल सकते हैं जिससे इनके काम करने की प्रक्रिया को समझने में मदद मिल सकती है.

ब्लैक कोहोश के अलग-अलग प्रकार की पहचान करने, साथ ही उनके प्रभावों का अध्ययन करने, की चुनौती पर कई आधुनिक अध्ययन हुए हैं जिनके ज़रिए इस लोकप्रिय वनस्पति के बारे में अधिक जानने की कोशिश की गई है.

‌‌ब्लैक कोहोश सप्लीमेंट का परीक्षण &सत्यापन  

महिलाओं के स्वास्थ्य और वेलनेस फॉर्मूलों में ब्लैक कोहोश की लोकप्रियता से फॉर्मूलों में मौजूद रासायनिक घटकों के अध्ययन में दिलचस्पी जगाने में मदद मिली है. परीक्षण और हर किस्म को वर्गीकृत करने की प्रक्रिया से अलग-अलग प्रजातियों की पहचान करने का एक तरीका मिला है.

हाई-परफ़ॉरमेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी, यानी एचपीएलसी, विश्लेषण के ज़रिए परीक्षण करने की एक तकनीक है जिसे एक खास लैब में किया जाता है। इस तकनीक में नमूने में मौजूद हर रासायनिक घटक को अलग करके हर घटक की पहचान और मात्रा पता लगाई जाती है. मौजूदा नमूने की तुलना पहले जांचे गए, दर्ज किए गए और पहचाने गए नमूनों से करके, विभिन्न रासायनिक घटकों और हर घटक की मात्रा को इस्तेमाल करके विभिन्न किस्मों की पहचान की जा सकती है.

जर्नल ऑफ़ एग्रीकल्चरल एंड फ़ूड केमिस्ट्री में प्रकाशित एक अध्ययन में, एचपीएलसी परीक्षण का इस्तेमाल करके कई ब्लैक कोहोश उत्पादों में ट्राइटर्पीन और फिनोलिक घटकों की मौजूदगी का विश्लेषण किया गया था. इस अध्ययन का एक महत्वपूर्ण परिणाम यह खोज थी कि कई अलग-अलग प्रकार के सिमिसिफ्यूगा को अक्सर एक-दूसरे की जगह इस्तेमाल किया जाता है. यह परेशानी की बात है क्योंकि हर किस्म की अपनी अनूठी रासायनिक प्रोफाइल होने की वजह से इनके प्रभाव अलग-अलग हो सकते हैं.

विश्लेषण के ज़रिए परीक्षण करने की एक और विधि है जिसमें डीएनए बायोटेक्नोलॉजी, जैसे कि TRU-ID™, का इस्तेमाल करके किसी वानस्पतिक घटक की प्रामाणिकता सुनिश्चित की जाती है. हालांकि किसी खास वानस्पतिक प्रजाति के उपयोग की पुष्टि करने के लिए आनुवंशिक परीक्षण का इस्तेमाल महत्वपूर्ण है, मगर ज़रूरी नहीं कि इससे नमूने में मौजूद किसी रासायनिक कंपाउंड की मात्रा पता चल जाए. उदाहरण के लिए, कई ब्लैक कोहोश उत्पादों में मानकों के मुताबिक बना हुआ एक अर्क होता है और एक कंपाउंड, जैसे कि ट्राइटर्पीन, का कुछ प्रतिशत सप्लीमेंट पैनल में पाया जा सकता है.

‌‌‌‌ब्लैक कोहोश कहाँ से आया है?

लोक वनस्पति विज्ञान की कई परंपराओं में ब्लैक कोहोश पाया जाता है, लेकिन आसानी से समझने के लिए, इस वनस्पति को यूरोपीय और एशियाई पारंपरिक चिकित्सा के नज़रिए से समझाया जा सकता है.

यूरोपीय परंपरा में, ब्लैक कोहोश अक्सर महिलाओं के हॉर्मोन को संतुलित रखने वाले फॉर्मूलों में पाया जाता है क्योंकि यह हॉट फ्लैशेस (तेज़ गर्मी लगने), रजोनिवृत्ति और महावारी से पहले के कई तरह के पैटर्न से जुड़े लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है. एक जर्मन वैज्ञानिक प्रकाशन में, सिमिसिफ्यूगा रेसमोसा पर शोध के 60 सालों की एक जांच से पता चला कि यह कारगर और अधिक सुरक्षित है. यकीनन, कई अध्ययनों में पाया गया कि ब्लैक कोहोश रजोनिवृत्ति से जुड़े वेज़ोमोटर के लक्षणों, जैसे कि तेज़ गर्मी लगने और रात को पसीना आने, को कम करने में कारगर है.

एशियाई परंपरा में, ब्लैक कोहोश प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़े फॉर्मूलों में पाया जा सकता है. 200 और 250 सीई के बीच लिखी गई पुरातन किताब शेन नोंग बेन को जिंग में, सैकड़ों औषधीय पौधों को वर्गीकृत किया गया और काव्य भाषा की मदद से उनके कार्यों के बारे में बताया गया. इस किताब को पढ़ा गया और इसका अनुवाद किया गया जिसे अक्सर द डिवाइन फार्मर्स मटेरिया मेडिका कहा जाता है. पुरातन किताबों में, एशियाई ब्लैक कोहोश किस्मों को "गर्मी और विषैले तत्वों को दूर करने", "यांग ची (जीवन ऊर्जा) बढ़ाने" और "प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने" के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला बताया गया है जिसका मतलब यह निकाला जा सकता है कि शरीर को ठंडा करने, बुखार से राहत देने में मदद करने और प्रतिरक्षा प्रणाली की मदद करने के साथ-साथ मौसमी सर्दी और ज़ुकाम के पैटर्न से जुड़े लक्षणों से राहत देने में मदद करने से जुड़े कार्य.

‌‌ब्लैक कोहोश & प्रतिरक्षा का स्वास्थ्य

महिलाओं के हॉर्मोन को संतुलित रखने के फॉर्मूलों में गर्मी से जुड़ी समस्याओं से राहत पाने में सामान्य मदद के लिए ब्लैक कोहोश को अन्य जड़ी-बूटियों के साथ मिलाना आम बात है, लेकिन यह सर्दी और ज़ुकाम के पैटर्न के लिए बने कई पारंपरिक फॉर्मूलों में भी पाया जा सकता है.

ज़िन यी सैन एक पारंपरिक फॉर्मूला है जिसमें ब्लैक कोहोश की एक एशियाई किस्म के साथ-साथ मैगनोलिया और अन्य जड़ी-बूटियां होती हैं। इसे नाक बंद होने, गंध न ले पाने और खून जमने पर इस्तेमाल किया जाता है जो एलर्जी, सर्दी-ज़ुकाम और कुछ प्रकार के फ्लू में आम बात है. 2019 में प्रकाशित, ताइवान में हुए एक देशव्यापी जनसंख्या-आधारित अध्ययन में, इस पुरातन फॉर्मूला के उपयोग और 10 साल की अध्ययन अवधि में एलर्जी से जुड़ी समस्याओं के कारण अस्पताल में भर्ती होने की कम गंभीर घटनाओं के बीच संबंध पाया गया था. इंटरनेशनल इम्यूनोफार्माकोलॉजी जर्नल में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में बताया गया कि ज़िन यी सैन से प्रतिरक्षा प्रणाली के कार्यों पर विविध प्रभाव पड़ता है जिससे नाक की एलर्जी के लक्षणों को कम करने में मदद मिली.

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ एंटीमाइक्रोबियल एजेंट्स में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि सिमिसिफ्यूगा हेयराक्लीफोलिया का अर्क एंटीवायरल के तौर पर काम कर सकता है. उस अध्ययन को पारंपरिक एशियाई औषधकोश में पाए गए हर्बल सप्लीमेंट्स की खास प्रजातियों के अर्क की जांच करने और उनके औषधीय प्रभाव के लिए ज़िम्मेदार रासायनिक घटकों का पता लगाने के लिए बनाया गया था. सर्दी और ज़ुकाम के फॉर्मूलों का अध्ययन करने की कोशिश के एक और उदाहरण में, पुरातन फॉर्मूले शेंग मा जेन जेन तांग में इस्तेमाल की गई सिमिसिफ्यूगा डह्यूरिका किस्म को अपनी एंटीवायरल क्रिया और इंसानी श्वसन तंत्र की कोशिकाओं के नुकसान को रोकने की क्षमता के लिए पहचान मिली थी.

यह बताना ज़रूरी है कि पारंपरिक एशियाई चिकित्सा में ब्लैक कोहोश को शायद ही कभी जड़ी-बूटी के तौर पर अकेले इस्तेमाल किया जाता है. सर्दी और ज़ुकाम के कई लोकप्रिय फॉर्मूलों में ब्लैक कोहोश होता है और इसे सांस की बीमारियों और नाक की एलर्जी में असरदार माना गया है, लेकिन इन प्रभावों के लिए ज़िम्मेदार अनोखे रासायनिक संयोजनों की जांच करने के लिए आगे और अध्ययनों की ज़रूरत है.

‌‌ब्लैक कोहोश, हड्डियों का स्वास्थ्य, & बढ़ती उम्र में स्वास्थ्य

आमतौर पर माना जाता है कि रजोनिवृत्ति का संबंध हड्डियों की सघनता में कमी से है. इस आपसी संबंध से जुड़े जैविक कार्य पेचीदा हैं, लेकिन शोध बताते हैं कि ब्लैक कोहोश समेत कई ऐसे हर्बल सप्लीमेंट्स हैं जो ऑस्टियोपीनिया, ऑस्टियोपोरोसिस और ऑस्टियोअर्थराइटिस में हड्डियों को होने वाले नुकसान को रोकने में मददगार हो सकते हैं. कुछ लोगों के लिए, स्वस्थ आहार और व्यायाम के साथ-साथ हॉर्मोन को संतुलित रखने वाले फॉर्मूलों, जिनमें ब्लैक कोहोश के साथ कोलेजन, विटामिन डी और विटामिन के होता है, का इस्तेमाल करने से हड्डियों के नुकसान को धीमा करने और कनेक्टिव टिशू की मज़बूती बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

सिमिसिफ्यूगा रेसमोसा और इस प्रकार के ब्लैक कोहोश से युक्त फॉर्मूलों पर कई अध्ययन हुए हैं और ऐसा पाया गया कि यह कोशिकाओं के विकास को बढ़ाकर, कोलेजन उत्पादन में मदद करके और हड्डियों को बनाने वाली कोशिकाओं के धातु में बदलने की प्रक्रिया को प्रभावित करके हड्डियों की सघनता कम होने से रोकने में मदद कर सकता है. ऐसा अनुमान है कि हड्डियों को बचाने वाले इस प्रभाव के लिए ट्राइटर्पीन सैपनिन कंपाउंड्स ज़िम्मेदार हो सकते हैं. अन्य अध्ययनों में सिमिसिफ्यूगा हेयराक्लीफोलिया पर परीक्षण किया गया, जो गठिया के इलाज के पारंपरिक एशियाई फॉर्मूलों में इस्तेमाल होने वाला ब्लैक कोहोश है। ऐसा पाया गया कि इस किस्म में मौजूद कंपाउंड्स से कोंड्रोप्रोटेक्टिव प्रभाव पड़ सकता है. कोंड्रोप्रोटेक्टिव कंपाउंड्स खास तौर पर जोड़ों के बीच की जगह को लगातार घटने से रोकने में मदद करते हैं जो गठिया की खासियत है और कार्टिलेज में पाई जाने वाली कोशिकाओं की सुरक्षा करके आर्टिकुलर जोड़ों के बायोमैकेनिक्स को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं.

हॉर्मोन और प्रतिरक्षा को स्वस्थ रखने के अलावा भी ब्लैक कोहोश में लगातार दिलचस्प क्षमता दिख रही है. सिमिसिफ्यूगा डह्यूरिका किस्म पर हुए दो हालिया अध्ययनों में पाया गया कि पांच जाने-पहचाने कंपाउंड्स के साथ-साथ, पहले अज्ञात तीन फिनोलिक कंपाउंड्स से उन अड्रीनल कोशिकाओं को सुरक्षा मिली जिन्हें ऑक्सीडेटिव नुकसान का खतरा था. इन एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड्स पर आगे और शोध की ज़रूरत है, लेकिन ऐसा अनुमान है कि वे दिमाग में मौजूद सीखने-समझने के कार्यों और याददाश्त से जुड़े न्यूरोट्रांसमीटर्स के विभाजन में शामिल एंजाइमों को रोकने में मदद करके न्यूरोप्रोटेक्टिव प्रभाव डाल सकते हैं. इससे केवल लक्षणों से राहत पाने के बजाय बढ़ती उम्र में स्वस्थ रहने में मदद पाने का एक और दिलचस्प मौका मिलता है, जिसमें ब्लैक कोहोश कोशिकाओं को बचाने के साथ-साथ रजोनिवृत्ति से जुड़े लक्षणों से राहत देने में मदद करता है.

‌‌‌‌ब्लैक कोहोश के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ब्लैक कोहोश शरीर के लिए क्या करता है?

शोध बताते हैं कि ब्लैक कोहोश एस्ट्रोजन को जुड़ने से रोकने के लिए एस्ट्रोजन रिसेप्टर्स से जुड़कर हॉर्मोन के उतार-चढ़ाव से जुड़े तकलीफ़देह लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है. इस बात के प्रमाण मौजूद हैं कि ब्लैक कोहोश आमतौर पर रजोनिवृत्ति की वजह से हड्डियों को होने वाले नुकसान को रोकने में भी मदद कर सकता है. अधिक अध्ययनों के ज़रिए यह जांच की जा रही है कि कैसे ब्लैक कोहोश सूजन के मार्गों को मदद देकर प्रतिरक्षा को स्वस्थ रखने और बढ़ती उम्र में स्वस्थ रहने में मदद कर सकता है.

क्या ब्लैक कोहोश से वज़न बढ़ सकता है?

इस बात के कोई सबूत मौजूद नहीं हैं कि ब्लैक कोहोश से वज़न बढ़ जाता है. आहार और व्यायाम के साथ, ब्लैक कोहोश शरीर की प्रणाली को नियंत्रित करने में मदद करके पूरे शरीर को स्वस्थ और तंदरुस्त बनाए रख सकता है.

ब्लैक कोहोश का असर दिखने में कितना समय लगता है?

आपकी सेहत और तंदरुस्ती के हाल का असर ब्लैक कोहोश के प्रभाव पर पड़ सकता है और परिणाम इकट्ठे दिख सकते हैं और हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं.

क्या ब्लैक कोहोश से एस्ट्रोजन बढ़ता है?

ब्लैक कोहोश की सिमिसिफ्यूगा रेसमोसा जैसी किस्मों में पाए जाने वाले कंपाउंड्स पर हुए अध्ययनों में पाया गया कि मुख्य चार ट्राइटर्पीनॉइड्स से एस्ट्रोजन का स्तर नहीं बढ़ा.

‌‌अंतिम विचार & व्यावहारिक सुझाव

स्वस्थ आहार और व्यायाम के साथ-साथ, ब्लैक कोहोश को अकेले जड़ी-बूटी के तौर पर या किसी फॉर्मूले में डालकर लेने से कई तरीकों से बढ़ती उम्र में स्वस्थ रहा जा सकता है. अपनी व्यक्तिगत सेहत और तंदरुस्ती का आकलन करने में मदद के लिए किसी योग्य पेशेवर चिकित्सक से परामर्श करना ज़रूरी है, लेकिन यहाँ कुछ अंतिम सुझाव दिए गए हैं जिन्हें ध्यान में रखकर उत्पाद चुनने चाहिए:

  • ऐसे उत्पाद ढूंढें जिनके लैटिन नाम के साथ-साथ आम नाम भी सप्लीमेंट फैक्ट्स पैनल में हों, यानी ब्लैक कोहोश की जड़ का अर्क (सिमिसिफ्यूगा रेसमोसा)
  • देखें कि रासायनिक घटक मानकों के मुताबिक हैं या नहीं, यानी ब्लैक कोहोश की जड़ का अर्क (2.5% ट्राइटर्पीन ग्लाइकोसाइड्स) (सिमिसिफ्यूगा रेसमोसा)
  • ऐसे उत्पाद ढूंढें जिनका परीक्षण एचपीएलसी परीक्षण या TRU-ID™ जैसे डीएनए परीक्षण जैसे तरीकों से किया गया है.
  • कुल मिलाकर, ऐसे उत्पाद ढूंढें जिनका परीक्षण किसी तीसरे पक्ष, जैसे कि आईटैस्टेड प्रोग्राम, ने किया है ताकि गुणवत्ता और प्रामाणिकता पहचानने में मदद मिले.

संदर्भ:

  1. सिमिसिफ्यूगा. विकिपीडिया. लास्ट मॉडिफाइड डेट 19, अक्टूबर 2018
  2. ट्रडिशनल युज़िज, फाइटोकेमिस्ट्री, फार्माकॉलॉजी एंड टौक्सिकौलजी ऑफ द जीनस सिमिसिफूगा: ए रिवियू. जर्नल ऑफ एथनोफार्माकॉलॉजी. 2017 सितंबर 14;209:264-282
  3. मास स्पेक्ट्रोमेट्रिक डीरेप्लीकेशन ऑफ नाइट्रोजन-कंटेनिंग कन्स्टिटूएंट्स ऑफ ब्लैक कोहोश (Cimicifuga racemosa L.), Fitoterapia. 2012 अप्रैल;83(3):441-60.
  4. इवैल्यूएशन ऑफ द बोटैनिकल औथेंटीसिटी एंड फाइटोकेमिकल प्रोफ़ाइल ऑफ ब्लैक कोहोश प्रोडक्टस बाइ हाइ-परफॉर्मेंस लिक्विड क्रोमोटोग्राफी विद सेलेक्टेड आइओन मोनिट्रिंग लिक्विड क्रोमोटोग्राफी-मास स्पेक्रोमेट्री. J Agric Food Chem. 2006 मई 3; 54(9): 3242–3253.
  5. डीएनए बारकोड आइडेंटिफिकेशन ऑफ ब्लैक कोहोश हर्बल डाइएट्री सप्लिमेंट्स. जर्नल ऑफ एओएसी इंटरनेशनल. जुलाई-अगस्त 2012;95(4): 1023-34.
  6. 60 इयर्स ऑफ सिमिसिफूगा रेसमोस मेडिसिनल प्रोडक्टस. Wien Med Wochenschr. 2017; 167(7): 147–159.
  7. सिमिसिफूगा रेसमोस ड्राइड एथानोलीक एक्सट्रैक्ट इन मेनोपौज़ल डिसऔर्डर्स: ए डबल-ब्लाइंड प्लसीबो-कंट्रोल्ड क्लीनिकल ट्राइल. Maturitas. 2005 अगस्त 16;51(4):397-404
  8. एफिकेसी ऑफ सिमिसिफूगा रेसमोस ऑन क्लाइमैक्टरिक कम्प्लेंट्स: ए रैंडमाइज्ड स्टडी वर्सिस लो-डोस ट्रान्स्डर्मल एस्ट्राडिओल. Gynecol Endocrinol. 2005 जनवरी; 20 (1): 30-5.
  9. यांग, शाउ-झोंग, द डिवाइन फार्मर्स मटीरिया मेडिका: ए ट्रांसलेशन ऑफ द शेन नोंग बेन काओ जिंग. ब्लू पौपी प्रेस. 1998.
  10. आइडेंटिफिकेशन ऑफ फुकिनोलिक एसिड फ्रोम सिमिसिफूगा हीरैकलेफोलिया एंड इट्स डेरिवेटिव्स ऐज़ नॉवल ऐन्टीवाइरल कंपाउंड्स अगेन्स्ट एंटीरोवाइरस A71 इन्फेक्शन. Int J Antimicrob Agents. 2019 फरवरी ;53(2):128-136.
  11. शेंग-मा-जे-जेन-तांग (Shoma-kakkon-to) इनहिबिटेड द साइटोपैथिक इफेक्ट ऑफ ह्यूमन रेस्पिरेट्री सिनसिशियल वाइरस इन सेल लाइंस ऑफ ह्यूमन रेस्पिरेट्री ट्रैक्ट. J Ethnopharmacol. 2011 मई 17;135(2):538-44.
  12. ट्रेण्ड्ज़ एंड प्रिस्क्रिप्शन पैटर्न्स ऑफ ट्रडिशनल चाइनीज़ मेडिसिन यूस एमंग सबजेक्ट्स विद अलर्जिक डीजीजीज: ए नेशनवाइड पौपुलेशन-बेस्ड एस्टडी. World Allergy Organ J. 2019; 12(2): 100001.
  13. ट्रडिशनल चाइनीज़ मेडिसिन, ज़िन-यी-सैन, रेड्यूसीस नेज़ल सिंपटम्स ऑफ पेशेंट्स विद परेनियल अलर्जिक राइनिटीज़ बाइ इट्स डाइवर्स इम्म्यूनोमौड्यूलेट्रि एफ़ेक्ट्स. Int Immunopharmacol. 2010 अगस्त;10 (8): 951-8.
  14. नैचुरल प्रोडक्टस फ्रोम चाइनीज़ मेडिसिन्स विद पोटेन्शल बेनेफिट्स टू बोन हेल्थ. मोलेक्यूल्स 2016 मार्च; 21 (3): 239.
  15. कम्बाइन्ड प्रिस्क्रिप्शन OAH19T) ऑफ अरलिया कोरडेटा थंब एंड सिमिसिफोगा हीरैकलेफोलिया कोमर एंड इट्स मेजर कमपाउंड्स इनहिबिट मैट्रिक्स प्रोटीनैसिस एंड वैसकूलर एंडोथेलियल ग्रोथ फैक्टर थ्रू द रेग्यूलेशन ऑफ माइटोजेन-ऐक्टिवेटेड प्रोटीन काइनेज़ पाथवे जे एथनोफार्माकोल . 2011 17 मई; 135 (2): 414-21.
  16. पोलिफेनोलिक कम्पाउंड्स विद ऐनटीऑक्सीडेंट पोटेन्शल एंड न्यूरो-प्रोटेक्टिव इफेक्ट फ्रोम सिमिसिफोगा डहूरिका (Turcz.) मैक्सिम. Fitoterapia. 2016 दिसम्बर; 115: 52-56.
  17. द इनसाइट ऑफ इन वीट्रो एंड इन सीलिको स्टडीज़ ऑन कोलनेस्ट्रेज इन्हिबिटर्स फ्रोम द रूट्स ऑफ सिमिसिफोगा डहूरिका (Turcz.) मैक्सिम. J Enzyme Inhib Med Chem. 2018; 33(1): 1174–1180.
  18. ब्लैक कोहोश: इनसाइट्स इंटू इट्स मेकनिजम्स ऑफ ऐक्शन. Integrative Medical Insights. 2008 अगस्त 27; 21–32
  19. फिजिऔलजी इंवेस्टिगेशन ऑफ ए यूनिक एक्सट्रैक्ट ऑफ ब्लैक कोहोश (Cimicifugae racemosae rhizoma): ए 6-मंथ क्लीनिकल स्टडी डेमन्स्ट्रेट्स नो सिस्टेमिक एस्ट्रोजेनिक इफेक्ट. J Womens Health Gend Based Med. 2002 मार्च 11:163-74.

अस्वीकरण: इन कथनों का फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने अनुमोदन नहीं किया है। ये प्रोडक्ट्स किसी बीमारी का निदान, इलाज या रोकथाम करने के लिए नहीं हैं।