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पूरे दिन कंप्यूटर पर काम करने वाले आँखों के स्वास्थ्य की रक्षा कैसे करें

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कंप्यूटर और डिजिटल स्क्रीन हमारे दैनिक जीवन का एक अत्यावश्यक हिस्सा बन गए हैं और लोग औसतन 6 से 9 घंटे इनकी और देखते हुए गुजारते हैं। वर्ष 2018 तक, यह अनुमान है कि दुनिया कि 84% जनता किसी न किसी प्रकार के डिजिटल स्क्रीन डिवाइस का प्रयोग कर रही है। अपेक्षा है कि आने वाले वर्षों में केवल इस संख्या में वृद्धि ही होगी।

इतने कम समय में लाखों लोगों को प्रभावित करने वाले सोशल डिस्टेंसिंग के आदेशों के कारण, पहले से कहीं अधिक वयस्क घर से काम कर रहे हैं, अधिक बच्चे घरों पर ही विद्यालय की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, और अधिक लोग कोन्फरेंस कॉल्स और मनोरंजन के उद्देश्यों हेतु डिजिटल स्क्रीन डिवाइस का प्रयोग कर रहे हैं।  

इसलिए, हमें अपनी आँखों का भली प्रकार से ध्यान रखना चाहिए। ज्यादा देर तक स्क्रीन को देखने को शुष्क आँखों, आँखों की थकान, सिर दर्द, और धुंधली दृष्टि का कारण माना जाता है। नीचे आपकी आँखों को स्वस्थ रखने में सहायक कुछ उपाय और "कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम" से बचाव करने से संबंधित सूचना दी गई है।” 

कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम क्या होता है?

कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम (CVS), कंप्यूटर, टेबलेट, और सेल फोन के सहित और अतिरिक्त, डिजिटल स्क्रीन का लंबे समय तक प्रयोग करने के कारण होने वाली दृष्टि से संबंधित समस्याओं का एक समूह होता है। CVS के लक्षणों में आँखों की थकान, धुंधली दृष्टि, आँखों का शुष्क होना, सिर दर्द, और यहाँ तक कि गर्दन व कंधों में दर्द भी शामिल हैं।

ये लक्षण कम रोशनी वाले परिवेशों में काम करने, डिजिटल स्क्रीन की रोशनी तेज होने, कर्मचारियों से संबंधित काम के ख़राब परिवेशों, दृष्टि से संबंधित समस्याओं को ठीक नहीं करवाने, या इन कारकों के समुच्चय का परिणाम हो सकते हैं। 

लोगों द्वारा अनुभव किए जाने वाले CVS के लक्षणों की सीमा स्क्रीन के सामने बिताए जाने वाले समय पर और ठीक नहीं करवाई गई आँखों की किसी समस्या, जैसे कि पास की नज़र धुंधली होना, दृष्टिवैषम्य, अपर्याप्त रूप से आँखों से ध्यान केन्द्रित कर पाना या आँखों में अपर्याप्त ताल-मेल का होना, और उम्र बढ़ने के कारण दृष्टि में बदलाव का होना, के उपस्थित होने पर निर्भर करती है।  

कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम के कारण

मुद्रित सामग्री डिजिटल स्क्रीन की तुलना में अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है क्योंकि स्क्रीन की तस्वीर हज़ारों छोटे-छोटे पिक्सेल से बनी होती है। इसे तस्वीर का रेज़लूशन भी कहते हैं, जो भिन्न हो सकता है, झिलमिला सकता है, और इसमे अक्सर कुछ सीमा तक चमक होती है। तब पढ़ने वाले को स्क्रीन को देखते समय आँखों पर ज़ोर डालना पड़ता है और अधिक ज़ोर देकर ध्यान केन्द्रित करना पड़ता है।

तब डिजिटल स्क्रीन पर लगातार ध्यान केन्द्रित करने के लिए आँखों की माँसपेशियों को लेंसों के साथ सामंजस्य बैठाने के लिए अधिक काम करना पड़ता है। अंततया, इसके परिणामस्वरूप CVS से संबंधित आँखों की थकान और धुंधली दृष्टि में वृद्धि हो सकती है। इसके अतिरिक्त, कव्स से संबंधित गर्दन में दर्द की सीमा को प्रयोक्ता के द्वारा आँखों में महसूस की जाने वाली थकावट की सीमा से जोड़ा जाता है। 

ऑफ्थेल्मिक एंड फीजियोंलॉजिकल ऑप्टिक्स जर्नल की एक समीक्षा के अनुसार मुद्रित सामग्री को पढ़ते समय की तुलना में कंप्यूटर का प्रयोग करते समय पलकों के झपकने की दर में गिरावट और अपूर्ण झपकियों की संख्या में वृद्धि हो जाती है। अंत में, डिजिटल स्क्रीन की तरफ देखते समय स्वैच्छिक रूप से अधखुली आँखों से देखने से भी पलकों के झपकने की दर में गिरावट आ सकती है। अतः, क्योंकि पलकों का झपकना आँखों को नम करने की प्रक्रिया होती है, इसकी अनुपस्थिति में आँखें शुष्क हो सकती है।  

बचाव ही उपाय है

CVS के अधिकतर लक्षण अस्थाई हो सकते हैं और डिजिटल स्क्रीन को देखने में बिताए जाने वाले समय को कम करने पर ये लक्षण समाप्त भी हो सकते हैं। हालांकि, कुछ व्यक्तियों में, दूरी की दृष्टि का धुंधलापन या शुष्क आँखों जैसे, लक्षण बने रह सकते हैं। अगर जाँच करवाने पर पर आप दृष्टिवैषम्य, दूर की वस्तुओं या पास की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाने की समस्या से ग्रस्त पाए गए हैं, तो आँखों के चिकित्सक से संपर्क करके परामर्श लें कि क्या चश्मा लगाने या उपचारात्मक उपायों को करने की आवश्यकता है। सबसे महत्वपूर्ण, अगर लक्षण दिखने शुरू होने के बाद आप कोई कदम नहीं उठाते हैं, तो वे बने रह सकते हैं, बार-बार हो सकते हैं, या स्थति और बिगड़ सकती है। 

कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम से बचने के 4 तरीके

1. अपने कार्य करने के स्थान को कर्मचारी परिस्थिति विज्ञान के डिज़ाइन के अनुरूप तैयार करें

सुनिश्चित करें कि डेस्कटॉप या लैपटॉप कंप्यूटर पर काम करते समय और स्क्रीन पर पढ़ते समय आप कर्मचारी परिस्थिति विज्ञान के डिज़ाइन का पालान करें। गर्दन में अत्यधिक खिंचाव पैदा करने वाली बैठने किसे बचने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश करें। 

विशेषज्ञ व्यक्ति की आँखों और स्क्रीन के बीच 20–40 इंच की अनुकूलतम दूरी, के साथ-साथ स्क्रीन को आँखों के स्तर से 15–20 डिग्री, लगभग 5 इंच, नीचे रखने का सुझाव देते हैं। इसका अर्थ है कि कंप्यूटर की स्क्रीन को देखते समय आपको सही कुरसी, जो आरामदायक होनी चाहिए, पर आराम से बैठना चाहिए, जिसकी ऊँचाई को समायोजित किया जाना चाहिए ताकि आप अपने पैर फर्श पर टिक सकें और टाइप करते समय आपकी कलाईयाँ कीबोर्ड पर नहीं टिकी होनी चाहिएं।  

2. अच्छी रोशनी का प्रयोग करें 

घर से काम करते समय, अच्छी रोशनी वाले कमरे में बैठें और अपनी स्क्रीन के कॉन्ट्रास्ट को घहरे और हल्के के बीच में बदलते रहें। अगर आपके काम में आपको पूरे दिन कंप्यूटर को देखना पडता है, तो एंटी-ग्लेयर स्क्रीन फिल्टर कंप्यूटर की स्क्रीन से आने वाली नीली रोशनी, चमक, और परावर्तन की मात्रा को कम कर सकते हैं। कुछ ऐप आपकी आँखों को राहत पहुँचाने के लिए डिजिटल डिवाइस की स्क्रीन से आने वाली नीली रोशनी की मात्रा को कम करते हैं। सबसे बढ़कर, परिवेश के अनुसार पर्याप्त रोशनी को वरीयता दी जानी चाहिए।  

3. अंतराल लें

आराम और लंबे समय तक स्क्रीन पर ध्यान केन्द्रित करने से आँखों को राहत देने के लिए अंतराल लें, क्योंकि यह आँखों को थकान से बचाने का सबसे अच्छा तरीका है। अमेरिकन ऑप्टोमेट्रिक असोसिएशन द्वारा विकसित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुशंसित, 20-20-20 नियम अपनी आँखों का ध्यान पुनः केन्द्रित करने में सहायता प्राप्त करने के लिए 20 फीट दूर रखी किसी वस्तु को देखने के लिए हर 20 मिनट में 20 सेकंड का अंतराल लेने का सुझाव देता है।

4. पलकें झपकाएं!

अंत में, पलकें झपकाने की कोशिश करें! पलकों का झपकना आँखों का स्वयं को नम रखने का तरीका है। आप शुष्क आँखों के उपचार हेतु आइ ड्रॉप्स का प्रयोग कर सकते हैं, लेकिन ऐसी आइ ड्रॉप्स का प्रयोग करने से बचें जो आँखों की लालिमा को दूर करने के लिए नफेज़लीन और टेट्राहाइड्रोज़लीन जैसे संघटकों का प्रयोग करती हैं। ये संघटक वैसोकंस्ट्रिक्टर्स होते हैं और आँखों की रक्तवाहिनियों, जो आँखों के लिए आवश्यक पोषक-तत्वों को आँखों तक पहुँचाने के लिए ऑक्सीजन से भरपूर रक्त का वहन करती हैं, को संकुचित करके आँखों की लालिमा को कम करने के लिए काम करते हैं। इन ड्रॉप्स का लंबे समय तक प्रयोग करने से, लालिमा बार-बार लौटकर आने लगती है।

आपके आँखों का स्वास्थ्य और ऑक्सीकरणरोधी तत्वों की शक्ति

अच्छी दृष्टि अमूल्य जीवन स्तर प्रदान करती है। शक्तिशाली ऑक्सीकरणरोधी तत्वों से भरपूर एक स्वास्थ्यवर्धक पोषण आपके आँखों के स्वास्थ्य में वृद्धि कर सकता है। एक कोकरेन रिव्यु में दर्शाया गया है कि कुछ पोषक तत्व, जैसे कि लूटीन, ज़ीएज़ेन्थिन, विटामिन सी और , और जिंक, आँखों के कुछ रोगों के होने के खतरे को कम करने में सहायता कर सकते हैं। 

लूटीन और ज़ीएज़ेन्थिन शक्तिशाली ऑक्सीकरणरोधी प्रभावों से युक्त कराटेनॉयड होते हैं और ये आँखों के रेटिना के केंद्र में पाए जाते हैं। ये दोनों यौगिक हरी पत्तेदार सब्जियों, मिर्च, लाल शिमला मिर्च, और अंडों में पाए जाए हैं, और इनमे नीली रोशनी को फिल्टर करने की क्षमता हो सकती है, जो आँखों के रेटिना में मौजूद रिसेप्टरों को होने वाली हानि को कम कर सकते हैं। हालांकि अभी तक सेवन संबंधी कोई आधिकारिक सुझाव मौजूद नहीं है, 30 से 40 मिलीग्राम प्रतिदिन की सुरक्षित सीमा को प्रदर्शित करने वाले डेटा के आधार पर, लूटीन और ज़ीएज़ेन्थिन का सेवन आहार पूरकों के रूप में करना सुरक्षित है।

विटामिन सी और ई कई खाद्य पदार्थों और सब्जियों में पाए जाने वाले ऑक्सीकरणरोधी गुणों से युक्त विटामिन हैं। विटामिन सी आहार में लिया जाने वाला एक अत्यावश्यक तत्व है क्योंकि मनुष्य स्वयं के शरीर में इसका निर्माण नहीं कर सकते हैं। आहार में इसकी उपस्थिति  कॉलेजन के निर्माण के लिए अत्यावश्यक होती है, कॉलेजन एक रचना संबंधी प्रोटीन होता है जो रक्त-वाहिनियों की दीवारों, शिराओं, स्नायुओं, और हड्डियों के लिए अत्यावश्यक होता है।

विटामिन ई वसा में घुलनशील विटामिन होता है शरीर के लिए एक ऑक्सीकरणरोधी के स्रोत के रूप में कार्य कर सकता है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि आँख के रेटिना में फैटी एसिड्स अत्यधिक मात्रा में पाए जाते हैं, और विटामिन ई के ऑक्सीकरणरोधी गुण फ्री रेडिकल्स के कारण होने वाले नुकसान से बचाने में सहायता कर सकते हैं। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) प्रतिदिन 75 से 90 मिलीग्राम विटामिन सी और 22 IU (इंटरनेशनल यूनिट्स) विटामिन ई का सेवन करने का सुझाव देता है। 

अध्ययनों में पाया गया है कि आहार पूरक के रूप में जिंक का सेवन करने से कुछ प्रकार के आँख के रोगों को बढ़ने से रोकने में सहायता मिल सकती है। जिंकc रेटिना के स्वास्थ्य में एक अहम भूमिका निभाता है क्योंकि उन एंजाइम्स को इसकी ज़रुरत होती है जो आँख के चया-पचय से उत्पन्न होने वाले ऑक्सीजन के रेडिकल्स को बाहर निकालते हैं। यह आँख के रचना संबंधी प्रोटीन और सेल मेम्ब्रेन में भी एक अहम भूमिका निभाता है। FDA’s द्वारा प्रतिदिन 11 मिलीग्राम का सेवन करने का सुझाव दिया जाता है, और अध्ययन दर्शाते हैं कि प्रतिदिन 40 से 80 मिलीग्राम आहार पूरक के रूप सेवन कराना सुरक्षित होता है। 

आँखें आपके संपूर्ण स्वास्थ्य की सूचक होती हैं

हम आँखों के द्वारा बहुत साड़ी दुनिया का अनुभव करते हैं। हमें अपनी आँखों को सुरक्षित रखना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि हम उन डिजिटल स्क्रीन से बार-बार अंतराल लें जिनपर अब हम निर्भर हैं और जिनसे हम दिनभर जुड़े रहते हैं।

याद रखें, बचाव ही उपाय है। 20-20-20 नियम का प्रयोग करें: अपनी आँखों का ध्यान पुनः केन्द्रित करने के लिए 20 फीट दूर रखी किसी वस्तु को देखने के लिए हर 20 मिनट में 20 सेकंड का अंतराल लें। क्योंकि यह जाहिर है कि बाकी के शरीर में दिखने से पहले कई रोग आँखों में दिखाई दे सकते हैं, इसलिए आँखों की जाँच के लिए हर एक या दो साल में आँखों के चिकित्सक के पास जाना महत्वपूर्ण है। 

अंततया, आप ऑक्सीकरणरोधी तत्वों भरपूर संतुलित आहार को खाना सुनिश्चित करें क्योंकि ये ना केवल आपकी आँखों की बल्कि आपके संपूर्ण स्वास्थ्य की रक्षा भी करेंगे।

संदर्भ: 

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अस्वीकरण: इन कथनों का फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने अनुमोदन नहीं किया है। ये प्रोडक्ट्स किसी बीमारी का निदान, इलाज या रोकथाम करने के लिए नहीं हैं।