प्लांटार फैसिटिस होने पर बीमारी से वापस कैसे उठें
प्लांटार फैसिटिस कुछ समय बहुत ही दर्दनाक और कमज़ोर करनेवाली हो सकती है, विशेष रूप से जब सुधार की आवश्यकता हो और समुचित ध्यान न दिया गया हो| अगर आपको कभी प्लांटार फैसिटिस हुई हो, तो आप जानते हैं कि वास्तव में, चलते हुए, काम करते हुए और दैनंदिन जीवन जीते हुए इस पीड़ादायक ऑर्थोपीडिक शिकायत के साथ कितना पीड़ादायक अनुभव होता है।
प्लांटार फैसिटिस रहते हुए काम करने के साथ सबसे मुश्किल बात यह है कि कोई भरोसा नहीं कि वह कब ठीक हो। उदाहरण के लिए, इस समस्या को हटाने के लिए, कोई स्पष्ट उत्तर नहीं है, विशेष रूप से जब वह गंभीर हो और कभी समाप्त न हो। हालांकि,प्लांटार फैसिटिस की गंभीरता को सीमित करने और शरीर पर उसके प्रभाव की अवधि को छोटा करने के अनेक संभावित तरीके हैं।
इस लेख में, हम प्लांटार फैसिटिस क्या है, इसके साथ कुछ व्यायामों, सहायक उपकरण और पूरक तत्त्वों की चर्चा करेंगे, जो इस समस्या में सहायता कर सकते हैं।
प्लांटार फैसिटिस क्या है?
प्लांटार फैसिटिस का उपचार कैसे करें, यह विषय आरंभ करने से पहले चर्चा कर लेते हैं कि वह क्या है और कैसे होता है।
प्लांटार का अर्थ पॉंव का तलवा होता है, और फैशिया वह पतला संयोजक तंतु होता है, जो पूरे शरीर में फैला होता है। प्लांटार फैसिटिस को बहुधा पॉंव की एड़ी और चाप के अगल-बगल एक दर्दनाक अनुभव समझा जाता है, जो आम तौर पर सुबह अधिक प्रभावी होता है और नर्माई और दर्द का वास्तविक क्षेत्र, साथ ही उसकी गंभीरता, प्रत्येक व्यक्ति में अलग होती है।
प्लांटार फैसिटिस का प्रभाव हर व्यक्ति में अलग होने के कारण उसकी विशाल परिधि हो सकती है, जो प्रत्येक व्यक्ति के लिए ठीक-ठाक प्रकट करना बहुत कठिन बना देती है। इस दर्द का कारण मोटा प्लांटार फेशिया होता है, जो एड़ी से अंगूठे तक पॉंव के निचले हिस्से में फैला होता है, जिसमें जलन और दाह होता रहता है। आम तौर पर, प्लांटार फैसिटिस दुरुपयोग या तंतु के अति उपयोग का परिणाम होता है, जो पॉंव के अलावा शरीर के दूसरे भागों से निर्माण हो सकता है।
प्लांटार फेशिया की बनावट ऐसी होती है, जिससे पॉंव को सहारा मिलता है और वह स्वाभाविक रूप से प्रतिक्रियात्मक होता है, इसीलिए जब उस पर “तनाव” या खिंचाव होता है, उसमें दर्द और जलन जैसी समस्याओं का खतरा उत्पन्न हो जाता है।
पारंपरिक अनुसंधान वातावरण में, फैशिया को सामान्य समझा जाता था, जिसमें न्यूरॉन या अन्य स्वातंरग्रही जैविक कार्य नहीं होते। लेकिन, फैशिया की हमारी समझ में परिवर्तन होते रहे। 2012 के एक अवलोकन में, शोधकर्ताओं ने फाशिया की परिभाषा और वर्गीकरण करनेवाले कई शोध किया और निष्कर्ष निकाला कि इस पतले संयोजक तंतु के उससे कई अधिक कार्य हैं, जितना हम समझते हैं।
फैशिया के दो बड़े कार्य, और जो प्लांटार फैसिटिस की दृष्टि से प्रासंगिक हैं, वह हैं स्थिरता और स्वांतरग्रही क्षमता। स्वातंरग्रहण शरीर की जागरूकता और नियंत्रण के साथ रिक्ति और समय के बीच परिचलन करने की हमारी क्षमता को कहते हैं। जब आप इस पर ध्यान देते हैं कि फैशिया पूरे शरीर में क्या करता है, यह समझना आसान हो जाता है कि प्लांटार फैसिटिस में ऐसी समस्यायें क्यों पेश आती हैं। पॉंवों पर प्लांटार फैशिया की मोटी परत पॉंव के चाप को आधार देने के लिए होती है, इसीलिए जब इस सामान्य कार्य का ध्यान नहीं रखा जाता, तो पॉंव का फैशिया प्रतिक्रिया देता है और पीड़ादायक हो जाता है।
उससे अधिक, फैशिया पर उतना ध्यान न दिए जाने के के कारण, जितना एक आंतरिक संयोजक तंतु होने के नाते उसे दिया जाना चाहिए, प्लांटार फैसिटिस के साथ बहुत बार गलतफहमी भी हो जाती है। प्लांटार फैसिटिस को आम तौर पर जलन के सामान्य तीव्र दौरों के रूप में दरकिनार कर दिया जाता है, हालांकि, अनुसंधान से दिखने लगा है कि प्लांटार फैशिया के अगल बगल में भी बहुत विघटन हुआ हो सकता है।
इससे इसपर हो सकता है फर्क न पड़े कि प्लांटार फैसिटिस में देखभाल कैसे की जा रही है, पर इससे आनेवाले समय में दर्द के दौरों से बचने और इस हड्डी से जुड़े तंतु के बारे में सोचने की दिशा में परिवर्तन अवश्य हो सकता है।
उदाहरण के लिए, संयोजक तंतु की क्षति अनेक कारणों से हो सकती है और यदि प्लांटार फैशिया का दुरुपयोग हो रहा हो, तो इन संयोजक तंतुओं के सामने दर्द के वास्तविक झटकों से भी गंभीर समस्याओं का खतरा पैदा हो सकता है। इसीलिए इस बीमारी का उपचार करते हुए दीर्घकालिक मुद्दों पर ध्यान देना महत्त्वपूर्ण होता है।
प्लांटार फैसिटिस का उपचार कैसे करें।
प्लांटार फैसिटिस के साथ जुड़ी एक अच्छी पर कभी-कभी उलझन में डालने वाली बात यह है कि इस समस्या के कई उपचार हैं, लेकिन उसके लिए निरंतर श्रम की आवश्यकता होती है। दाहशामक टैबलेट केवल लेने भर से दर्द पर शुरुआती राहत मिल सकती है, किंतु दुरुपयोग और अतिउपयोग निरंतर समस्यायें होते हुए इससे कोई खास फायदा नहीं होता।
सच यह है कि प्लांटार फैसिटिस में सफलता तभी मिल सकती है, जब कई पूर्वसक्रिय चरण निरंतर और दैनंदिन स्तर पर काम में लाए जाएं। नीचे, प्लांटार फैसिटिस के लिए पूर्वसक्रियता की चार पद्धतियॉं दी गई हैं।
1. पिंडली और पॉंव को खींचना
प्लांटार फैसिटिस में दर्द को सीमित करने का पहला और सबसे आसान तरीका है पॉंव की पिंडली और तलवे को खींचना। इससे उस तनाव में संभावित राहत मिल सकती है, जो वर्तमान रूप से प्लांटार फैशिया को विपरीत रूप से प्रतिक्रियात्मक बना देती है।
सीटेड काफ़ स्ट्रेच कैसे करें
ऐसा आसान स्ट्रेच जो हर कोई कर सकता है वह है सीटेड काफ़ स्ट्रेच। एक कुर्सी पर बैठिए,प्रभावित पॉंव को बाहर खींचिए और दूसरे को <90 अंश के कोण में लाइए। एक व्यायाम बैंड या तौलिया लीजिए और उसे खींचे गए पॉंव के अगल-बगल रखिए। पॉंव को अपनी ओर खींचिए, धीरे-धीरे स्ट्रेच बढ़ाइए और ऐसा करते हुए लंबी सॉंसें लीजिए।
इस स्ट्रेच को उठते समय, दोपहर को और सोने से पहले कीजिए। प्लांटार फैसिटिस का अनुभव वापस होने के समय यह पूर्वसक्रियचरण के रूप में भी उपयोग हो सकता है।
2. मसाज
जलन से प्रभावित फैशिया को स्ट्रेच करने के बाद एक बार मसाज करें, खुद को मसाज करना अगला चरण और शक्तिशाली पद्धति हो सकती है। प्रतिक्रियात्मक होने पर फैशिया हल्की मसाज से अच्छा लाभ ले सकता है, और इसे करना भी तुलना में सरल होता है।
खुद से मसाज कैसे करें
स्ट्रेच करने जैसी स्थिति में ही बैठिए, हालांकि अब वह पॉंव मोड़ना होगा, जिसमें प्लांटार फैसिटिस की तकलीफ़ हो। हल्के से अपने अंगूठों को पॉंव के चाप में और उस क्षेत्र में घुसाएं, जहॉं एड़ी चाप से मिलती है।
इस प्रक्रिया को करते हुए फूट मॉश्चराइज़िंग क्रीम का उपयोग करना उपयोगी हो सकता है क्योंकि इस कारण आराम से अंगूठे हिल सकते हैं, और जब आप अपने पॉंवों की मसाज कर रहे हों, क्यों न उन्हें थोड़ा नम भी कर लें? यह करने को आसान है और एक तीर से दो निशाने।
3. फिश ऑयल (ओमेगा 3s)
ऐसा कोई एक पूरक तत्त्व नहीं है, जिसका प्लांटार फैसिटिस पर तत्काल सीधा प्रभाव हो, किंतु ऐसे पूरक तत्त्व हैं, जो आपको दीर्घकालिक पीड़ा और जलन में काम आ सकते हैं। ऐसा एक पूरक तत्त्व, जिससे प्लांटार फैसिटिस में लाभ हो सकता है, वह है एकउच्च गुणवत्ता का ओमेगा 3.
ओमेगा-3एस का सुझाव संभावित रूप से आपके शरीर के दाह को कम करने के लिए होता है, जिसके कारण आगे अन्य पूर्वसक्रिय चरणों के साथ लेने पर प्लांटार फैसिटिस की गंभीरता को कम कर सकता है। ओमेगा-3 लेते समय, 250-500एमजी डीएचए और ईपीए एक साथ लेने का ध्येय रखें।
4. कर्क्यूमिन
ऐसा एक और पूरक तत्त्व जो अप्रत्यक्ष तौर से सकारात्मक प्रभाव प्लांटार फैसिटिस पर डाल सकता हैकर्क्यूमिन, ऐसा एक और पूरक तत्त्व जो अप्रत्यक्ष तौर से सकरात्मक प्रभाव प्लांटार फैसिटिस पर डाल सकता है, जो एक बहुत जैवउपलब्ध यौगिक है, जो हल्दी जैसे पूरक तत्त्वों में मिलता है। शरीर में, कर्क्यूमिन के अनेक एंटीऑक्सिडेंट और दाहशामक प्रभाव होते हैं। यह रोज़मर्रा एक पूरक तत्त्व के रूप में अच्छा विकल्प है, जब निरंतर ध्येय सामान्य जलन कम करना हो।
पूर्वसक्रिय बनें
प्लांटार फैसिटिस कभी-कभी बहुत ही अधिक परेशान कर सकती है, पर उसे विचारपूर्वक और सक्रियता के साथ प्रबंधित किया जा सकता है। प्लांटार फैसिटिस को सीमित करने की सबसे अच्छी पद्धति है गंभीर रूप से परिचलन, दैनिक स्वभाव और सामने आ रही समस्या की देखभाल।
यदि प्लांटार फैसिटिस में दुरुपयोग या अतिउपयोग की समस्या हो, तो प्रबल संभावना है कि कई समस्यायें शरीर के भीतर चल रही हों, और ऐसे में एक अच्छा पूर्वसक्रिय चरण हो सकता है, घुटनों और नितंब जैसे क्षेत्रों का आकलन करना है कि वह कैसे परिचलन कर रहे हैं।
संदर्भ:
- https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3430451/
- https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3951039/
- https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/21784145
- https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC5664031/
अस्वीकरण: इन कथनों का फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने अनुमोदन नहीं किया है। ये प्रोडक्ट्स किसी बीमारी का निदान, इलाज या रोकथाम करने के लिए नहीं हैं।