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नेत्र स्वास्थ्य बढ़ाने के लिए 10 प्राकृतिक विचार पद्धति

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मोतियाबिंद क्या है?

मोतियाबिंद एक प्रगतिशील बीमारी है जिसकी वजह से आँखों का लेंस धुंधला हो जाता है। मोतियाबिंद को डॉक्टरों ने तीन श्रेणियों में बांटा है – न्यूक्लियर, कॉर्टिकल, और पोस्टेरियर सबकैप्सुलर। इसका इलाज न करने पर आँखों/नजर को भारी नुकसान पहुँच सकता है और कभी-कभी मरीज पूरी तरह अँधा भी हो जाता है।

मोतियाबिंद की सर्जरी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें धुंधले लेंस को निकालकर उसकी जगह एक नया लेंस लगा दिया जाता है और ऐसा करना हमेशा मुमकिन नहीं होता है। जिन देशों में लोगों के पास स्वास्थ्य सेवा सम्बन्धी सुविधाएं हैं वहां 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों में यह सर्जरी काफी आम है। लेकिन, दुनिया में अभी भी ऐसी कई जगहें हैं जहाँ सर्जरी एक व्यवहारिक विकल्प नहीं है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कहाँ रहते हैं, कम उम्र में ही मोतियाबिंद को बनने से रोकना एक बहुत अच्छी स्ट्रेटेजी है।

मोतियाबिंद से जुड़े जोखिम

मेडिकल डॉक्टरों का मानना है कि मोतियाबिंद होने की मुख्य वजह लेंस का ऑक्सीकरण ही है। इसके जोखिम कारकों में शामिल है - बहुत ज्यादा अल्ट्रावॉयलेट सूर्य की रौशनी में आना, तम्बाकू चबाना, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, और कुछ दवाइयाँ, जैसे ओरल कॉर्टिकोस्टेरॉयड्स (प्रेडनिसोन) का दीर्घकालिक उपयोग। बहुत ज्यादा अल्कोहल का सेवन करने से भी मोतियाबिंद होने की बहुत ज्यादा सम्भावना रहती है।

आहार और मोतियाबिंद

एंटीऑक्सीडेंट्स मोतियाबिंद को बनने से रोकने में मदद कर सकते हैं। फल और रंगीन सब्जियों से भरे आहार में अनगिनत एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो आँखों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकते हैं। 2010 में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर आहार, मोतियाबिंद के विकास को धीमा करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, 2013 में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि फल, सब्जी, और विटामिन सी से भरपूर आहार, मोतियाबिंद को बनने से रोकने में मदद कर सकता है।

फूड्स और सप्लीमेंट्स में मौजूद कई हर्ब्स, विटामिन्स, और मिनरल्स में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं जो आँखों की रक्षा करने में मदद कर सकते हैं।

‌‌लुटेन, ज़ियाजैन्थिन, और विजुअल हेल्थ

विजुअल हेल्थ को ठीक रखने में दो आम कैरोटेनॉयड्स काफी मददगार साबित हो सकते हैं। 2017 में मॉलिक्यूल्स में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि लुटेन और ज़ियाजैन्थिन में एंटीऑक्सीडेंट और ब्लू-लाइट फिल्ट्रेशन गुण पाए जाते हैं, जो नजर को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट्स, आँखों के लेंस को होने वाले ऑक्सीकारी नुकसान को रोककर मोतियाबिंद को रोकने में मदद कर सकते हैं। इस जर्नल में बताया गया कि रोज 6 से 10 मिलीग्राम लुटेन लेने वाले लोगों में मोतियाबिंद की सर्जरी की सम्भावना 20 से 50 प्रतिशत कम हो गई थी।

लेकिन, अधिकांश रिसर्च के अनुसार,लुटेन और ज़ियाजैन्थिन दोनों को एक साथ लेना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। हरी पत्तेदार सब्जियों और फलों में ये दोनों प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। आहार के माध्यम से पर्याप्त रूप से इनका सेवन न कर पाने पर, एक बढ़िया सप्लीमेंट लेना चाहिए। प्रस्तावित खुराक: लेबल पर बताए गए अनुसार।

‌‌देवदार की छाल का अर्क एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है।

देवदार की छाल के अर्क का इस्तेमाल असल में उत्तर अमेरिका और एशिया के स्वदेशी लोगों द्वारा एक दवा के तौर पर किया जाता था। फ्रांस के लिए कनाडा का दावा करने वाले फ्रांसीसी अभियानकर्ता जेकस कार्टियर ने 1535 में अपने अभियान के दौरान विटामिन सी के अपर्याप्त सेवन स्तर के कारण होने वाली स्कर्वी नामक बीमारी के इलाज के लिए कथित तौर पर देवदार की छाल के अर्क का इस्तेमाल किया था।

आज, एकीकृत स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं ने भी देवदार की छाल के अर्क के कई स्वास्थ्य और बुढ़ापा-विरोधी लाभों को समझा है, जिसकी शुरुआत सबसे पहले 1987 में एक डाइटरी सप्लीमेंट के तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका में की गई थी। बाजार में इससे जुड़े कई फ़ॉर्मूले मौजूद हैं, और इसे एक कैप्सूल के रूप में लिया जा सकता है, एक आवश्यक तेल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, या एक लोशन में मिलाकर जरूरत वाली जगह पर लगाया जा सकता है।

एंटीऑक्सीडेंट्स ऐसे पदार्थ हैं जो नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स से टिशू और अंगों की रक्षा करते हैं। नेत्र विज्ञान सम्बन्धी रिसर्च में एक अध्ययन से पता चला कि पायक्नोजेनोल की एंटीऑक्सीडेंट क्षमता, विटामिन सी, विटामिन ई, अल्फा-लिपिक एसिड, और कोएंज़ाइम Q10 से काफी अधिक थी।

2017 में डॉ. जे. किम द्वारा जानवरों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि देवदार की छाल का अर्क, मोतियाबिंद को बनने से रोक सकता है। 2013 में किए गए एक अध्ययन में भी यही बातें सामने आई थीं। प्रस्तावित खुराक: रोज एक या दो बार 50 से 250 मिलीग्राम।

‌‌क्वेर्सटिन और सूजन-विरोधी लाभ

पॉलिफिनॉल क्वेर्सटिन एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जिसमें सूजन-विरोधी प्रभाव और विजुअल लाभ होने का पता चला है। कुछ अध्ययनों में यह भी देखने को मिला है कि आँतों के माइक्रोबियोम पर क्वेर्सटिन के कुछ सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं, यानी यह स्वस्थ अंत बैक्टीरिया को पनपने में मदद करता है।

क्रेनबेरी, काले अंगूर, रास्पबेरी, हरी पत्तेदार सब्जियां, ब्रोकोली, कच्चे लाल प्याज, लाल चाय, और हरी चाय में यह प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

2010 में किए गए एक अध्ययन में कुछ ऐसे संभावित तरीकों पर चर्चा की गई थी जिनकी मदद से क्वेर्सटिन, मोतियाबिंद को विकसित होने से रोक सके। 2019 में किए गए एक अध्ययन में भी डायबिटीज के मरीजों में मोतियाबिंद को रोकने में क्वेर्सटिन की भूमिका का पता चला था। प्रस्तावित खुराक: लेबल पर बताए गए अनुसार।

‌‌रेस्वेराट्रोल के रक्षात्मक लाभ

रेस्वेराट्रोल में कई फंक्शन देखने को मिले हैं। रेस्वेराट्रोल एक फाइटोन्यूट्रीएंट है जो रेड वाइन, अंगूर, जामुन, और नट्स में नेचुरल रूप में पाया जाने वाला एक पौधा आधारित यौगिक है। इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण, ऑक्सीकारी नुकसान से कोशिका और उसके घटकों की रक्षा करते हैं। इस बार-बार के नुकसान के कारण कोशिका की खुद को नियंत्रित करने की क्षमता ख़त्म हो सकती है। इसकी वजह से मोतियाबिंद का खतरा भी बढ़ सकता है।

2006 में किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई थी कि रेस्वेराट्रोल युक्त चीजें खाने से वरिष्ठ नागरिकों में मोतियाबिंद होने का खतरा कम हो सकता है। इसके अलावा, 2016 के एक अध्ययन में भी रेस्वेराट्रोल के रक्षात्मक लाभ देखने को मिले थे। प्रस्तावित खुराक: लेबल पर बताए गए अनुसार।

‌‌सेलेनियम, ऑक्सीकारी नुकसान से लड़ने में मदद कर सकता है

सेलेनियम को एक ट्रेस मिनरल माना जाता है जो मानव शरीर में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 24 से अधिक बायोकेमिकल रिएक्शन्स में इसकी जरूरत पड़ती है, और कोशिका प्रजनन, DNA संश्लेषण, और ऑक्सीकारी नुकसान से रक्षा करने में मदद करने के लिए इसका होना जरूरी है। यह जैविक और अजैविक दोनों रूपों में पाया जाता है।

ब्राज़ील नट्स, ऑर्गन मीट्स, और सीफ़ूड में यह प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह पोल्ट्री, अंडे, अनाज, और दुग्ध उत्पादों में भी मिल सकता है।

इसमें ऑक्सीकारी नुकसान को कम करने में मदद करने की क्षमता होने के कारण, यह मोतियाबिंद की रोकथाम में काफी मददगार साबित हो सकता है। 2012 में चूहों पर किए गए एक अध्ययन में, मोतियाबिंद को रोकने में सेलेनियम का रक्षात्मक लाभ देखने को मिला था। इसके अलावा, 2018 में किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई थी कि "सीरम सेलेनियम स्तर और उम्र-सम्बन्धी मोतियाबिंद के बीच एक पक्के जुड़ाव के कारण, कम सीरम सेलेनियम स्तर के कारण उम्र सम्बन्धी मोतियाबिंद का खतरा पैदा हो सकता है।” प्रस्तावित खुराक: लेबल पर बताए गए अनुसार।

‌‌स्पिरुलिना के सूजन-विरोधी और एंटीऑक्सीडेंट कार्य

स्पिरुलिना को कई लोग एक सुपरफ़ूड मानते हैं। यह आसानी से पचने लायक न्यूट्रीशनल सप्लीमेंट है जो नीली-हरी शैवाल के परिवार से संबंधित है और इसे एक गोली या पाउडर के रूप में लिया जा सकता है। स्पिरुलिना एक तरह के बैक्टीरिया से मिलता है जिसे वैज्ञानिक सायनोबैक्टीरियम, ख़ास तौर पर अर्थ्रोस्पिरा प्लैटेंसिस कहते हैं।

पारंपरिक रूप से, स्पिरुलिना, अफ्रीका, हवाई, और मैक्सिको की गर्म क्षारीय झीलों में उगता है। स्पिरुलिना का इस्तेमाल सदियों पहले एज़्टेक्स द्वारा किया जाता था, विजेताओं के स्पेनिश रिकॉर्ड्स के अनुसार – यह मैक्सिको के टेक्सकोको झील में उगता था जहाँ एज़्टेक्स इसे टीकुलाटी कहते थे। यूरोपियन अभियानकर्ताओं ने अफ्रीका के चाड झील के पास रहने वाले स्थानीय लोगों को इसका इस्तेमाल भोजन के तौर पर करते हुए देखा था। हमारे आधुनिक युग में, नासा के वैज्ञानिकों का ध्यान स्पिरुलिना पर गया है जिन्होंने इसका इस्तेमाल बाहरी अंतरिक्ष में जाने वाले एस्ट्रोनॉट्स के लिए एक पौष्टिक न्यूट्रीशनल सप्लीमेंट के रूप में किया है।

स्पिरुलिना में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स, और फाइटोन्यूट्रीएंट्स होते हैं। इसके अलावा, स्पिरुलिना में सूजन-विरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण भी पाए जाते हैं जो मोतियाबिंद को रोकने में काफी मदद कर सकते हैं।

2013 और 2014 में किए गए अध्ययनों से पता चला है कि स्पिरुलिना का सेवन करने से मोतियाबिंद के विकास की क्रिया बंद हो सकती है। प्रस्तावित खुराक: लेबल पर बताए गए अनुसार।

‌‌अध्ययन के अनुसार विटामिन सी के एंटीऑक्सीडेंट लाभ

विटामिन सी, जिसे एस्कोर्बिक एसिड या एस्कोर्बेट के नाम से भी जाना जाता है, पिछले 100 सालों में सबसे ज्यादा रिसर्च वाले विटामिनों में से एक है। एक वैज्ञानिक साहित्य सम्बन्धी खोज में पता चला है कि विटामिन सी पर 1920 के दशक से अब तक 65,000 से भी ज्यादा अध्ययन किए गए हैं। कई निष्कर्षों से पता चला है कि यह एक मजबूत इम्यून सिस्टम के साथ-साथ कार्डियोवैस्कुलर, मस्तिष्क, और आँखों की सेहत बढ़ाने में भी मदद कर सकता है।

कई वैज्ञानिकों का मानना है कि मानव शरीर में कभी विटामिन सी बनाने की क्षमता हुआ करती थी लेकिन समय के साथ यह क्षमता ख़त्म हो गई। मनुष्य, बन्दर, और गिनी सूअरों को छोड़कर, अधिकांश स्तनपायी प्राणियों सहित, जानवरों की सभी प्रजातियाँ, विटामिन सी बना सकती हैं। मस्तिष्क और एड्रिनल ग्रंथियों में विटामिन सी की सांद्रता सबसे अधिक होती है, जो खून में विटामिन सी की सांद्रता की तुलना में 15 से 50 गुना अधिक होती है। विटामिन सी, जिसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, कम-से-कम आठ महत्वपूर्ण बायोकेमिकल रिएक्शन्स के लिए एक एंज़ाइम "सह-कारक" की भूमिका भी निभाता है।

द अमेरिकन जर्नल ऑफ़ क्लिनिकल न्यूट्रीशन, में एक 2009 अध्ययन के अनुसार, छः साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों के खून की जांच करने पर उनमें से सात प्रतिशत से ज्यादा लोगों में विटामिन सी की कमी पाई गई थी। उनमें से आधे से अधिक लोगों ने कम परिमाण में विटामिन सी युक्त खाना खाया था। उस भोजन में सिट्रस, स्ट्रॉबेरी, आम, काली मिर्च, इत्यादि चीजें शामिल थीं।

भारत के बाहर एक 2011 अध्य्यन में पाया गया कि जिनके शरीर में विटामिन सी का स्तर सबसे कम था उनमें ज्यादा स्तर वाले लोगों की तुलना में मोतियाबिंद होने की सम्भावना 39 प्रतिशत अधिक थी।

इसके अलावा, नेत्र विज्ञान में एक 2014 अध्ययन में भी यही पाया गया कि खून में अधिक विटामिन सी स्तर वाले लोगों को मोतियाबिंद होने की सम्भावना कम थी। अन्य अध्ययनों में इसी तरह के नतीजे सामने आए हैं। प्रस्तावित खुराक: रोज 500 से 2,000 मिलीग्राम।

‌‌सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए मल्टीविटामिन्स

एक मल्टीविटामिन से कभी भी एक स्वास्थ्यप्रद और संपूर्ण आहार की जगह लेने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि दुनिया भर में 2 बिलियन लोग, विटामिन्स और मिनरल्स का पर्याप्त सेवन नहीं कर पाते हैं। अध्ययनों से पता चला है कि कई अमेरिकी भी कई जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स का पर्याप्त सेवन नहीं कर पाते हैं। हाल ही में 2015-2020 में अमेरिकियों के लिए आहार सम्बन्धी दिशानिर्देशों में यह बात सामने आई थी कि वसा में घुलनशील विटामिन्स , डी, के साथ-साथ जल में घुलनशील विटामिन सी और क्लोरीन का सेवन भी कम किया जा रहा था।

न्यूट्रीएंट्स में एक 2014 अध्ययन में यह बात सामने आई थी कि मल्टीविटामिन लेने वाले लोगों में मोतियाबिंद होने की सम्भावना 34 प्रतिशत कम थी। एक बढ़िया मल्टीविटामिन एक व्यक्ति को अतिरिक्त आश्वासन दे सकता है।

2014 में एक नेत्र विज्ञान सम्बन्धी अध्ययन में एक रैंडमाइज्ड, डबल-ब्लाइंड, प्लेसिबो-कंट्रोल्ड ट्रायल के परिणाम प्रकाशित किए गए थे। इस अध्ययन में 50 साल और उससे ज्यादा उम्र के कुल 14,641 अमेरिकी पुरुष चिकित्सकों ने 11 साल से ज्यादा समय के लिए भाग लिया था। आधे लोग रोज मल्टीविटामिन लेते थे जबकि बाकी के आधे लोग प्लेसिबो लेते थे। अध्ययन के अंत में देखा गया कि मल्टीविटामिन लेने वाले लोगों में 9 प्रतिशत कम मोतियाबिंद हुआ था। यहाँ इस बात पर गौर करना जरूरी है कि अधिकांश मल्टीविटामिन में मात्र 60 मिलीग्राम के आसपास विटामिन सी होता है जो कि एक मामूली खुराक है। मल्टीविटामिन लेने वाले कई लोग अक्सर सप्लीमेंट के तौर पर जरूरत के आधार पर अलग से अलग-अलग विटामिन लेते हैं। प्रस्तावित मल्टीविटामिन खुराक: लेबल पर बताए गए अनुसार।

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