नए साल में अपने स्वास्थ्य की दिनचर्या को बेहतर बनाने के लिए 3 सप्लीमेंट्स
नया साल करीब आ रहा है, आप नया जोश और नई शुरूआत चाहते होंगे। हम में से कई लोगों के लिए यह साल बहुत मुश्किल रहा है। इसके अलावा, छुट्टियां तनाव भरी हो सकती हैं और त्योहारों में खूब खाने के बाद, सकारात्मक और स्वस्थ तरीके से नए साल की शुरूआत करना बुरा ख्याल नहीं है।
2021 में आप ये तीन स्वस्थ आदतें अपनाने की कोशिश करने के बारे में सोच सकते हैं: मल्टीविटामिन्स लेना, भरपूर इलेक्ट्रोलाइट्स लेना और ग्रीन टी पीना।
मल्टीविटामिन्स आहार को पूर्ण रूप से स्वस्थ बनाने में मदद कर सकते हैं
मल्टीविटामिन/खनिज (एमवीएम) सप्लीमेंट्स दुनिया में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले सप्लीमेंट्स हैं। सबसे अच्छा है कि हमें सभी ज़रूरी पोषक तत्व अपने आहार के ज़रिए मिलें, लेकिन असलियत यह है कि ज़्यादातर अमेरिकियों में इनकी कमी है। लगभग 75% वयस्क सुझाई गई मात्रा में फल नहीं खाते और 80% से ज़्यादा लोग सुझाई गई मात्रा में सब्जियां नहीं खाते। हम पर्याप्त साबुत अनाज और कम वसा वाले डेयरी उत्पाद भी नहीं खाते और हम रिफाइंड अनाज, सैचुरेटेड फैट, बाद में डाली हुई शर्करा और सोडियम का सेवन भी बहुत ज़्यादा करते हैं। आहार के ये खराब तौर-तरीके मोटापे और हृदय रोग और मधुमेह जैसे गंभीर रोगों का कारण बनते हैं।
2015-2020 डाइटरी गाइडलाइन्स खास तौर पर कई “कम पोषक तत्वों” पर रोशनी डालती हैं, जो कम मात्रा में लिए जा रहे पोषक तत्व हैं और इसलिए इससे स्वास्थ्य पर बुरे प्रभाव पड़ सकते हैं। खासकर विटामिन डी, कैल्शियम, पोटेशियम और आयरन, “लोक स्वास्थ्य के पोषक तत्वों का मुद्दा हैं।” हम विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन ई, कोलीन और मैग्नीशियम भी पर्याप्त नहीं लेते।
चूंकि केवल आहार के माध्यम से सभी ज़रूरी पोषक तत्व पाना इतना मुश्किल है, इसलिए आपको एमवीएम लेने के बारे में सोचना चाहिए। यह पोषण की कमी को पूरा कर सकता है, आपके स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है और यहां तक कि गंभीर रोग के खतरे को कम कर सकता है।
मल्टीविटामिन्स में विटामिन्स और खनिजों का मेल होता है और कभी-कभी अन्य सामग्रियां भी शामिल होती हैं। ये गोलियों, चबाने लायक गमी, पाउडर और तरल समेत कई रूपों में उपलब्ध हैं। दिन में एक बार लिए जाने वाले आम उत्पाद सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाले एमवीएम हैं। इन सप्लीमेंट्स में आमतौर पर सभी या ज़्यादातर विटामिन्स और खनिजों की तकरीबन उतनी ही मात्रा होती है जितनी मात्रा रोज़ लेने की सिफारिश की जाती है। अन्य अधिक प्रभावी एमवीएम उत्पादों के साथ-साथ ऐसे उत्पाद भी मौजूद हैं जिन्हें प्रतिरोधक क्षमता को सुधारने या ऊर्जा बढ़ाने जैसे खास कामों के लिए बनाया गया है।
इसकी कोई मानक परिभाषा नहीं है कि एमवीएम में कौन-से या किस स्तर पर पोषक तत्व शामिल होने चाहिए। बल्कि, निर्माता चुनते हैं कि अपने उत्पादों में कौन-से विटामिन, खनिज, और अन्य सामग्रियां डालनी हैं और किस मात्रा में डालनी हैं। निर्माताओं को उत्पादों पर एक सप्लीमेंटल फैक्ट्स लेबल और सामग्रियों की सूची लगाना आवश्यक होता है, इसलिए हमेशा प्रतिशत दैनिक मूल्य (%डीवी) जांचना ज़रूरी है ताकि आप देख सकें कि आपके दैनिक भाग का कितना प्रतिशत आपको मिल रहा है।
विटामिन और खनिज क्या काम करते हैं?
विटामिन और खनिज, जिन्हें माइक्रोन्यूट्रिएंस के नाम से भी जाना जाता है, ऐसे पदार्थ होते हैं जो हमारे शरीर के सामान्य रूप से काम करने के लिए ज़रूरी होते हैं। साथ मिलकर, ये शरीर में सैकड़ों महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाते हैं जिनमें कोशिकाओं और प्रोटीन का निर्माण, भोजन को ऊर्जा में बदलना, प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाना, हड्डियों को मज़बूत बनाना, रक्त कोशिकाओं का निर्माण, मांसपेशियों का संकुचन, दिल की लय को बनाए रखना और घाव भरना शामिल है।
विटामिन्स में वसा में घुलनशील और पानी में घुलनशील विटामिन शामिल होते हैं। विटामिन ए, विटामिन डी, विटामिन ई और विटामिन के वसा में घुलनशील विटामिन हैं। विटामिन सी और बी विटामिन्स: थायमिन(बी1), राइबोफ्लेविन (बी2), नियासिन (बी3), पैंथोथेनिक एसिड (बी5), पाइरीडॉक्सीन (बी6), कोबालामीन (बी12), बायोटिन और फोलिक एसिड पानी में घुलनशील विटामिन हैं। खनिजों में कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, सोडियम, क्लोराइड, मैग्नीशियम, आयरन, जस्ता, आयोडीन, क्रोमियम, सल्फर, कोबाल्ट, तांबा, फ्लोराइड, मोलिब्डेनम, मैंगनीज़ और सेलेनियम शामिल हैं। विटामिन और खनिज अक्सर शरीर में एक साथ काम करते हैं। उदाहरण के लिए, आहार में शामिल विटामिन सी आयरन को बेहतर ढंग से अवशोषित करने में शरीर की मदद करता है।
विटामिन की कमी से समस्या
लंबे समय तक सही मात्रा में आवश्यक विटामिन और खनिज न लेने से इनकी कमी हो सकती है जिससे आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, स्कर्वी नामक एक रोग जिसमें बेहद कमज़ोरी, सूजन, मसूड़ों से खून आने, दांत ढीले होने और त्वचा पर घाव होने की समस्याएं आती हैं, वह विटामिन सी की कमी की वजह से होता है। 15वीं से 18वीं शताब्दी तक लंबी समुद्री यात्राओं के दौरान ताज़े फल और सब्जियों की कमी की वजह से अक्सर नाविक इस बीमारी का शिकार हो जाते थे। रिकेट्स विटामिन डी की कमी के कारण होता है और इसमें हड्डियां नरम, कमज़ोर और विकृत हो जाती हैं और उनका विकास रूक जाता है। यह आजकल बहुत ही कम दिखता है क्योंकि इस रोग को मिटाने की कोशिश में दूध में विटामिन डी मिलाया जाता है। विटामिन ए की कमी की वजह से रतौंधी, घाव भरने में गड़बड़ी और एनीमिया होता है। यह दुनिया भर में बच्चों में रोके जा सकने वाले अंधेपन की मुख्य वजह है।
क्या आपको मल्टीविटामिन लेने चाहिए?
कई लोग पोषण बीमा के तौर पर मल्टीविटामिन्स लेते हैं, ताकि यह पक्का कर सकें कि सिर्फ़ भोजन से ज़रूरतें पूरी न हो पाने पर भी वे सुझायी गई मात्रा में विटामिन और खनिज ले रहे हों। एमवीएम में पाए जाने वाले कुछ विटामिन या खनिज लेने से खास तरह के लोगों को लाभ हो सकता है। उदाहरण के लिए:
- शाकाहारियों और वीगन लोगों को अपने आहार के साथ-साथ विटामिन बी12 और विटामिन डी समेत विभिन्न पोषक तत्वों के सप्लीमेंट लेने की ज़रूरत पड़ सकती है।
- गर्भवती हो सकने वाली महिलाओं को अपने बच्चों में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट के जोखिम को कम करने के लिए पर्याप्त मात्रा में फोलिक एसिड लेने की ज़रूरत होती है। ध्यान दें कि इस समस्या से बचने में मदद करने के लिए अनाज उत्पादों में अक्सर फोलिक एसिड मिलाया जाता है।
- गर्भवती महिलाओं को आयरन का सप्लीमेंट लेना चाहिए, जिसके लिए आमतौर पर प्रीनेटल विटामिन (प्रसवपूर्व विटामिन) लिया जाता है।
- जिन शिशुओं ने स्तनपान और आंशिक रूप से स्तनपान किया है, उन्हें विटामिन डी के सप्लीमेंट्स की ज़रूरत हो सकती है।
- रजोनिवृत महिलाएं हड्डियां कमज़ोर होने की गति धीमी करने और फ्रैक्चर का खतरा कम करने के लिए कैल्शियम और विटामिन डी ले सकती हैं।
- 50 से ज़्यादा की उम्र के लोगों को विटामिन बी12 के सप्लीमेंट की ज़रूरत हो सकती है।
क्या मल्टीविटामिन्स रोगों से बचाने में मदद करते हैं?
स्वास्थ्य को सुधारने और गंभीर बीमारियों से बचाने में मल्टीविटामिन्स की भूमिका पर हुए अध्ययन मिले-जुले हैं और कुछ कारणों से उन्हें समझना मुश्किल है। पहली बात, डाइटरी सप्लीमेंट्स ज़्यादातर वे लोग लेते हैं जो स्वस्थ आहार और जीवन शैली अपनाते हैं, इसलिए यह पहचानना मुश्किल होता है कि फायदे सप्लीमेंट्स लेने से हुए हैं या जीवन शैली से जुड़ी अन्य वजहों से हुए हैं। इसके अलावा, ज़्यादातर अध्ययन रैंडमाइज़्ड कंट्रोल्ड ट्रायल्स के बजाय निरीक्षण संबंधी रहे हैं, इसलिए नतीजों से संबंध पता चल सकता है, लेकिन कारण और प्रभाव संबंध साबित नहीं होता।
ध्यान देने लायक एक अध्ययन फिजिशियन्स हेल्थ स्टडी II है। यह सबसे लंबा रैंडमाइज़्ड कंट्रोल्ड क्लिनिकल ट्रायल है जो जांच करता है कि क्या एमवीएम गंभीर रोगों से बचाने में मदद कर सकते हैं। 50 और उससे ज़्यादा उम्र के 14,641 पुरुष चिकित्सकों को रोज़ एक एमवीएम या प्लेसबो लेने के लिए कहा गया और 11.2 साल के औसत समय से ज़्यादा तक उन पर नज़र रखी गई। एमवीएम लेने वाले समूह में कैंसर होने का खतरा मामूली लेकिन पहले से काफी कम (8%) पाया गया था, हालांकि इससे प्रोस्टेट कैंसर के खतरे या कैंसर से होने वाली मृत्यु की कुल दर में कमी नहीं आई थी। इसके अलावा, हृदय रोगों की घटनाओं, दिल के दौरे, स्ट्रोक या हृदय रोगों से जुड़ी मौतों में कोई कमी नहीं आई थी।
एक अन्य महत्वपूर्ण अध्ययन एज-रिलेटेड आई डिज़ीज़ स्टडी था। जिन प्रतिभागियों को विटामिन सी, विटामिन ई, बीटा कैरोटीन, जस्ता और तांबे की उच्च खुराक दी गई, उनमें उम्र के साथ मैक्युलर डीजेनेरेशन और नज़र कमज़ोर होने का खतरा काफी कम पाया गया। उम्र के साथ मैक्युलर डीजेनेरेशन होना (एएमडी) संयुक्त राज्य अमेरिका में अंधेपन की मुख्य वजह है।
मल्टीविटामिन्स लेते वक़्त जोखिम और सावधानियां
रोज़ाना एक एमवीएम लेने से ज़्यादातर लोगों के स्वास्थ्य को कोई खतरा नहीं होता। हालांकि, कुछ मामलों में बहुत अधिक मात्रा में विटामिन लेने का बुरा असर पड़ सकता है, इसलिए यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि आप किसी भी पोषक तत्व को उसकी सुरक्षित अधिकतम सीमा से ज़्यादा मात्रा में न लें। कुछ उदाहरण हैं:
- गर्भावस्था के दौरान विटामिन ए की बहुत अधिक मात्रा लेने से जन्म दोष का खतरा बढ़ सकता है।
- पुरुषों और रजोनिवृत महिलाओं को आयरन सप्लीमेंट्स या उनके लिए सुझायी गई दैनिक मात्रा (8 मिलीग्राम/दिन) से अधिक आयरन वाला एमवीएम नहीं लेना चाहिए, जब तक की उनके हेल्थकेयर प्रोवाइडर ने इसकी सलाह न दी हो। अतिरिक्त आयरन लीवर और जोड़ों जैसे टिशूज़ में जमा हो सकता है।
- खून पतला करने की दवा लेने वाले लोगों को विटामिन के युक्त किसी भी एमवीएम लेने से पहले अपने हेल्थकेयर प्रोवाइडर से बात करनी चाहिए क्योंकि इससे दवा का असर कम हो जाता है।
इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर में तरल का स्तर सही रखने में मदद करते हैं
इलेक्ट्रोलाइट्स हमारे शरीर के तरल पदार्थ में मौजूद खनिज होते हैं जिनमें इलेक्ट्रिक चार्ज होता है। इनमें सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम, क्लोराइड, मैग्नीशियम, फॉस्फेट और बाइकार्बोनेट शामिल हैं। इलेक्ट्रोलाइट्स मानव शरीर के सामान्य कामकाज के लिए ज़रूरी हैं और कई प्रक्रियाओं में शामिल होते हैं। वे हमारे शरीर में तरल पदार्थ का संतुलन बनाए रखने और पीएच (अम्लता/क्षारीयता) को सामान्य बनाए रखने में मदद करते हैं। वे एक कोशिका से दूसरी कोशिका में इलेक्ट्रिक इम्पल्स भेजते हैं जिससे नर्व इम्पल्स को उत्तेजित करने, मांसपेशियों को संकुचित करने और दिल की धड़कन को नियंत्रित करने जैसे कामों में मदद मिलती है। हमारे शरीर में तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स के स्तर को स्थिर रखने में गुर्दे एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हमें अपने खाने-पीने की चीज़ों से इलेक्ट्रोलाइट्स मिलते हैं और ये फल, सब्जियों, गिरियों, बीजों और डेयरी उत्पादों जैसे कई खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं।
इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन
आपके शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का स्तर बहुत ज़्यादा या कम होने पर इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो सकता है। ये असंतुलन आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकते हैं और बेहद गंभीर स्थिति में घातक भी हो सकते हैं। इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन होने पर थकान, चिड़चिड़ापन, सुन्न हो जाना और मांसपेशियों में ऐंठन जैसे हल्के लक्षणों से लेकर मानसिक स्थिति में बदलाव, दिल की धड़कनों का अनियमित होना, सांस फूलना और दौरा पड़ना जैसे ज़्यादा गंभीर लक्षणों तक कई तरह के लक्षण मौजूद हो सकते हैं।
इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन की एक सबसे आम वजह निर्जलीकरण है। निर्जलीकरण तब होता है जब आप तरल पदार्थ लेते कम हैं और खोते ज़्यादा हैं। नतीजा यह होता है कि आपके शरीर में सामान्य कार्यों के लिए पर्याप्त पानी और अन्य तरल पदार्थ नहीं रहते।
निर्जलीकरण कई वजहों से हो सकता है जैसे कि:
- उल्टी और दस्त
- बुखार और/या संक्रमण
- बहुत ज़्यादा पसीना आना और/या कड़ा व्यायाम करना
- दवाएं (जैसे मूत्रवर्धक दवाएं जिनसे पेशाब ज़्यादा आने लगता है)
अन्य स्वास्थ्य समस्याओं जैसे अनियंत्रित मधुमेह, गुर्दे की बीमारी, कंजेस्टिव हार्ट फेलियर, गंभीर चोटें (जैसे जलना) और भोजन विकारों की वजह से इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो सकता है।
आज बाज़ार में स्पोर्ट्स ड्रिंक, पाउडर मिश्रण, लिक्विड कॉन्सन्ट्रेट, गोलियां, घुलने वाली गोलियां और गमी समेत कई इलेक्ट्रोलाइट उत्पाद उपलब्ध हैं। कुछ उत्पाद बोतलबंद तरल फॉर्मूले होते हैं जिन्हें सीधे पी सकते हैं और कुछ उत्पादों को पानी में मिलाना होता है। ये बड़े आकार के कंटेनर या एक व्यक्ति के लायक सर्विंग पैकेट में मिल सकते हैं। इलेक्ट्रोलाइट्स के अलावा, इनमें से कुछ उत्पादों में पानी और कार्बोहाइड्रेट जैसी अन्य सामग्रियां भी हो सकती हैं।
आप किस तरह का उत्पाद चुनेंगे वह आपकी व्यायाम की आदतों समेत कई तरह की बातों पर निर्भर करेगा। उत्पादों पर विचार करते वक़्त ध्यान रखें कि आप किस तरह की और कितनी कड़ी कसरत कितनी देर तक करते हैं। आपको स्वाद पर भी विचार करना चाहिए क्योंकि उससे इस बात पर फ़र्क पड़ सकता है कि आप उसे कितनी मात्रा में लेंगे। एथलीटों पर हुए शोध में पाया गया है कि सादे पानी की तुलना में स्पोर्ट्स ड्रिंक के स्वाद की वजह से वे उसे ज़्यादा मात्रा में पीते हैं।
एक बात ध्यान रखना ज़रूरी है कि स्पोर्ट्स ड्रिंक जैसे कुछ उत्पादों में अक्सर बड़ी मात्रा में शुगर होती है—उतनी ही जितनी सोडा के एक कैन में होती है। अगर आप इसे कसरत के बाद पी रहे हैं, तो हो सकता है कि आप कसरत के दौरान खपाई गई कैलोरी से ज़्यादा कैलोरी ले रहे हों। इसलिए सजग रहें और जो भी उत्पाद आज़मा रहे हों, उसका न्यूट्रीशन लेबल पढ़ें।
इलेक्ट्रोलाइट्स किसे लेने चाहिए?
ज़्यादातर लोगों को एक संतुलित आहार से सारे ज़रूरी इलेक्ट्रोलाइट्स मिल जाने चाहिए। हमारे शरीर में उनका सही संतुलन बनाए रखने के लिए नियंत्रक प्रणाली होती हैं। हालांकि, इलेक्ट्रोलाइट सप्लीमेंट्स व्यायाम जैसी कुछ स्थितियों में कम हुए तरल पदार्थ, इलेक्ट्रोलाइट्स और ऊर्जा की भरपाई करने में मदद कर सकते हैं। शारीरिक गतिविधि के दौरान पसीने में निकले हुए पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई करने के लिए आपको अतिरिक्त तरल पदार्थ की ज़रूरत होती है। सोडियम और क्लोराइड पसीने में सबसे अधिक मात्रा में पाए जाने वाले इलेक्ट्रोलाइट्स हैं, जबकि पोटेशियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम थोड़ी मात्रा में मौजूद होते हैं।
व्यायाम के पहले, दौरान और बाद में सही मात्रा में तरल लेना ज़रूरी है। कसरत के दौरान शरीर के पानी में 1-2% जितनी मामूली कमी से भी फोकस और प्रदर्शन में गिरावट आ सकती है। 1 घंटे से ज़्यादा देर तक चलने वाले कड़े व्यायाम के दौरान या अगर आप गर्म मौसम में कसरत कर रहे हैं, तो उस दौरान इलेक्ट्रोलाइट की भरपाई करना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।
अगर आप बीमार हैं, तब भी आपको इलेक्ट्रोलाइट लेने के बारे में सोचना चाहिए, खासकर उल्टी या दस्त लगने के दौरान जब इलेक्ट्रोलाइट में गड़बड़ी बहुत ज़्यादा हो सकती है। कुछ स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित लोगों को भी इलेक्ट्रोलाइट्स के सप्लीमेंट से लाभ हो सकता है जैसे कि मालअब्सोर्बशन सिंड्रोम, हार्मोनल या एंडोक्राइन डिसऑर्डर या गुर्दे की बीमारी से पीड़ित लोग।
इलेक्ट्रोलाइट्स लेने के जोखिम और सावधानियां
सभी चीज़ों की तरह, बहुत ज़्यादा इलेक्ट्रोलाइट्स लेने के नुकसान हो सकते हैं। ज़्यादातर स्वस्थ लोगों को इलेक्ट्रोलाइट के सप्लीमेंट्स लेने से कोई समस्या नहीं होनी चाहिए, लेकिन खास स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित या ख़ास दवाएं ले रहे लोगों को इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का खतरा ज़्यादा हो सकता है। उदाहरण के लिए, गंभीर किडनी रोग से पीड़ित लोगों में पोटेशियम और फॉस्फेट का स्तर ऊंचा होने की संभावना ज़्यादा होती है, जो सप्लीमेंट्स लेने से बढ़ सकती है। हाइपरकालेमिया (पोटेशियम का उच्च स्तर) सीने में दर्द, पेट में दर्द, मतली, उल्टी, दस्त, तेज़ धड़कन, दिल की धड़कनों के अनियमित होने और मांसपेशियों में कमज़ोरी की वजह बन सकता है। हाइपरफॉस्फेटेमिया (फॉस्फेट का उच्च स्तर) मांसपेशियों में ऐंठन, सुन्न हो जाने, झुनझुनी, हड्डियों में दर्द, खुजली और लाल चकत्तों की वजह बन सकता है। कुछ तरह के कैंसर या पैराथायराइड विकारों से पीड़ित लोगों को हाइपरकैल्सेमिया (कैल्शियम का उच्च स्तर) होने का खतरा हो सकता है। इससे हड्डियों में दर्द, सिर दर्द, घबराहट, मतली, उल्टी, कब्ज, पेट के निचले हिस्से में दर्द, मांसपेशियों में दर्द, ऐंठन और मरोड़ की समस्या हो सकती है।
ग्रीन टी स्वास्थ्य को कई लाभ देती है
चाय दुनिया में सबसे व्यापक रूप से पीया जाने वाला एक पेय है, जो पानी के बाद दूसरे नंबर पर है। एक कप चाय पीने से सुकून और आराम मिल सकता है। लेकिन सदियों से चाय को चिकित्सा में भी इस्तेमाल किया गया है और अब आधुनिक शोध इस बात को वैज्ञानिक आधार दे रहे हैं कि यह स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
ग्रीन टी कमीलया सिनेसिस पौधे से बनती है, वही पौधा जिससे ब्लैक टी, व्हाइट टी और ऊलोंग टी जैसी सभी पारंपरिक चाय बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अलग-अलग तरह की चाय के लिए काफी हद तक पत्तियों के ऑक्सीकरण का स्तर ज़िम्मेदार होता है। जैसे ऑक्सीजन के संपर्क में आने पर एवोकाडो या केले का रंग भूरा हो जाता है, ठीक वैसे ही, काटे जाने के बाद चाय की पत्तियां ऐसी ही प्रक्रिया से गुज़रती हैं। पूरी तरह से ऑक्सीडाइज़ हो चुकी चाय की पत्तियों का रंग गहरा होकर भूरा या काला हो जाएगा। इससे एक ऐसा उत्पाद मिलता है जिसका स्वाद कड़क और ज़्यादा तेज़ होता है। चाय की जो पत्तियां बिल्कुल भी ऑक्सीडाइज़ नहीं होती, वे हरी रहती हैं और उनसे बनने वाले उत्पाद का स्वाद ज़्यादा हल्का होगा। ऑक्सीकरण प्रक्रिया को रोकने के लिए ग्रीन टी की पत्तियों को आमतौर पर पैन में फ्राई किया जाता है या भाप दी जाती है, इससे पहले कि वे सूख जाएं। ऑक्सीकरण के स्तर का असर न केवल चाय के स्वाद पर पड़ता है, बल्कि चाय की रासायनिक संरचना और इस तरह इसके स्वास्थ्य लाभों पर भी पड़ता है।
ग्रीन टी कई अलग अलग रूपों में उपलब्ध है जिसमें चाय की खुली पत्तियां, टी बैग, पाउडर, बोतलबंद और कैप्सूल या अर्क के रूप में बेचे जाने वाले सप्लीमेंट्स शामिल हैं। माचा, जिसका शाब्दिक अर्थ “पाउडर” है, ग्रीन टी का एक खास रूप है। इसे बनाने के लिए ग्रीन टी की पत्तियों को पीसकर बारीक पाउडर बनाया जाता है। पारंपरिक ग्रीन टी की तुलना में इसे अलग तरह से काटा जाता है और इसका स्वाद तेज़ होता है जिसे कभी कभी घास या पालक जैसा कहा जाता है। पारंपरिक रूप से इसे गर्म पानी के साथ फेंटकर एक झागदार पेय बनाया जाता है।
ग्रीन टी के स्वास्थ्य लाभ
ग्रीन टी मन को शांत करती है, मनोदशा को अच्छा बनाती है और एकाग्रता व स्मृति शक्ति को बढ़ाती है। यह कैफीन और एल-थिएनाइन नामक एक अद्वितीय अमीनो के संयोजन के कारण है। कैफीन स्मृति, सतर्कता, मनोभाव तथा मस्तिष्क के विभिन्न भागों में सुधार करता है। एल-थिएनाइन निरोधात्मक न्यूरोट्रांसमीटर गामा-मीनोब्यूट्रीक एसिड (जीएबीए) गतिविधि बढ़ा देता है, जिसमें एंटी-एंग्जाइटी प्रभाव होते हैं। यह मनोदशा को अच्छा बनाने वाले न्यूरोट्रांसमीटर डोपामाइन और सेरोटोनिन का उत्पादन बढ़ाता है।
ग्रीन टी में पॉलीफिनोलस भी होते हैं, जो कि प्राकृतिक पौधों से बने हुए यौगिक हैं जिनमें एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने वाले गुण पाये जाते हैं। एंटीऑक्सीडेंट वे यौगिक होते हैं जो कि शरीर में मुक्त रूप से घूमने वाले हानिकारक तत्वों के प्रभाव को खत्म करते हैं। ये मुक्त रूप से घूमने वाले हानिकारक तत्व हमारी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों जैसे हृदय रोग, स्व-प्रतिरक्षित रोग, और कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं। सूजन कई पुरानी बीमारियों और समय से पहले बूढ़ा हो जाने का मूल कारण माना जाता है।
कैटेचिन एक विशिष्ट प्रकार के पॉलीफिनोलस होते हैं, और ग्रीन टी में अधिक मात्रा में एक विशेष कैटेचिन एपीगैलोकैटेचिन-3-गैलेट (ईजीसीजी) होता है। ईजीसीजी ग्रीन टी के कई स्वास्थ्य वर्धक कारकों के लिए उत्तरदायी है।
विभिन्न तरीके हैं जिनसे ये पौधों से बने यौगिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं जिनमें शामिल हैं:
- कोलेस्ट्रॉल कम करके, रक्तचाप कम करके और वाहिकाओं में रक्त के प्रवाह में सुधार करके दिल के स्वास्थ्य को करके बेहतर बनाना।
- रक्त शर्करा को विनियमित करने में मदद करना
- मस्तिष्क स्वास्थ्य सहायक
- प्रतिरक्षा तंत्र शक्तिशाली बनाना
- चयापचय तंत्र शक्तिशाली बनाना
- वजन प्रबंधन में सहायक
- अस्थि घनत्व में सहायक
- त्वचा को बूढ़ा होने से बचाना
अगर यह सब आपको समझाने के लिए पर्याप्त नहीं है, तो बस इतना अवश्य जान लीजिए कि ग्रीन टी आपको लम्बे समय तक जीने में मदद कर सकती है। 40,000 से अधिक जापानी व्यस्कों में किये गये एक अध्ययन में पता चला कि, ग्रीन टी के सेवन से सभी प्रकार से होने वाली मृत्यु दर में कमी आयी है, मुख्य रूप से हदय रोग से होने वाली मृत्यु दर में। इसका पूरी तरह से लाभ लेने के लिए, आपको ग्रीन टी को अवश्य अपनी दिनचर्या का एक आवश्यक हिस्सा बनाना चाहिए। यह न केवल मन को आराम देता और आत्मा को शांत करता है, बल्कि आपके स्वास्थ्य को भी बहुत लाभ पहुंचाता है!
ग्रीन टी लेने में जोखिम और सावधानियां
हालांकि अधिकांश वयस्कों के लिए ग्रीन टी का सेवन करना सुरक्षित है, लेकिन इसके कुछ संभावित दुष्प्रभाव भी हैं। अधिकांश दुष्प्रभाव तब उत्पन्न होते हैं जब ग्रीन टी का सेवन अत्यधिक मात्रा में किया जाता है, जिसकी संभावना तब बढ़ जाती है जब ग्रीन टी का सेवन चाय के रूप में न करके सप्लीमेंट्स के रूप में किया जाता है। ये दुष्प्रभाव मुख्य रूप से ग्रीन टी में पाये जाने वाले कैफीन की वजह से होते हैं। हालाँकि ग्रीन टी में कैफीन केवल मध्यम मात्रा में ही होता है (8 आउन्स के कप में लगभग 35 मिलीग्राम), कैफीन की मात्रा हर चाय में अलग-अलग होती है जो कि उपयोग की गयी चाय की मात्रा तथा उसके पत्तों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। जो लोग कैफीन के प्रति संवेदनशील हैं वे सिर दर्द, चिंता, अनिद्रा और पेट खराब होना जैसे लक्षणों का अनुभव कर सकते हैं। गर्भवती महिलाओं को सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि वे कैफीन का सेवन अपने चिकित्सक द्वारा सुझायी गयी सीमित मात्रा में ही कर रहीं हैं। दुर्लभ मामलों में, ग्रीन टी शरीर में आयरन का अवशोषण कर सकती है जिससे कि एनीमिया हो सकता है। जिन सप्लीमेंट्स में ईजीसीजी बहुत उच्च स्तर में होता है उनका उपयोग करने से यकृत में क्षति होने की संभावना होती है। ग्रीन टी संभावित रूप से कुछ दवाओं के साथ अंतःक्रिया भी कर सकता सकता है इसीलिए अधिक मात्रा में इसका उपयोग करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य कर लें।
संदर्भ:
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