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ओमेगा-3 फैटी एसिड्स के स्वास्थ्य लाभ

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ओमेगा-3 फैटी एसिड्स, जिसे पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड्स या PUFAs के रूप में भी जाना जाता है, जो मानव स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। माना जाता है कि रेजोल्विनस, सक्रिय मेटाबोलाइट्स, जो अध्ययन के अनुसार सूजन को कम करने में मदद करते हैं, के कारण   हृदय, मस्तिष्क, आंत और जोड़ों पर इनके अनेक लाभ हैं।

ओमेगा-3 फैटी एसिड्स में निम्न शामिल होते हैं:

  • अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ALA, ओमेगा-3 फैटी एसिड), जो अलसी, अखरोट, सोया, चिया के बीज और भांग के बीज में पाया जा सकता है।
  • इकोसापेंटेनोइक एसिड (EPA), जो आमतौर पर मछली के तेल, क्रिल्ल तेल, और अंडे (यदि मुर्गियों को EPA खिलाया जाता है) में पाया जाता है।
  • डोकोसाहेक्साएनोइक एसिड (DHA, ओमेगा-3 फैटी एसिड), मानव मस्तिष्क, त्वचा और आंखों का एक बड़ा घटक है। हालांकि, इसे "आवश्यक" नहीं माना जाता है क्योंकि इसका निर्माण तब होता है जब कोई व्यक्ति अपने आहार में पर्याप्त मात्रा में अल्फा लिनोलेनिक एसिड (ALA) का सेवन करता हो।

2014 के एक अध्ययन से पता चला है कि अधिकांश अमेरिकी वयस्क ओमेगा-3 फैटी एसिड की अनुशंसित साप्ताहिक मात्रा का सेवन नहीं करते हैं - 90 प्रतिशत अमेरिकी अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन द्वारा अनुशंसित प्रति सप्ताह लो-मरकरी मछली की 3.5-आउंस की दो सर्विंग्स का सेवन नहीं करते हैं। यह कमी उत्तरी अमेरिका के लिए ही नहीं बल्कि पूरे यूरोप, मध्य पूर्व और एशिया के कुछ हिस्सों के लिए अद्वितीय है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि कई सामान्य स्थितियों में इनके पर्याप्त सेवन से लाभ हो सकता है।

ओमेगा-3 फैटी एसिड्स और ADHD

ध्यान अभाव अतिसक्रियता विकार या ADHD एक आम स्थिति है जिसका सामना सभी उम्र के लोगों को करना पड़ता है। स्कूल के पारंपरिक परिवेश में बच्चों के लिए, ADHD बेहद कमजोरी उत्पन्न करने वाले और आत्मविश्वास को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने वाले हो सकते हैं। लाखों वयस्क भी इस स्थिति से पीड़ित हैं, जो काम पर और व्यक्तिगत संबंधों में समस्याएं पैदा कर सकती है। चिकित्सक द्वारा लिखी गई दवाएं काफी सहायक हो सकती हैं, लेकिन उनके दुष्प्रभाव भी होते हैं। 2016 के एक अध्ययन से पता चला है कि ओमेगा-3 फैटी एसिड्स ADHD लक्षणों वाले लोगों के इलाज में फायदेमंद हो सकते हैं। अन्य अध्ययनों में भी इनके लाभ का पता चला है।

ओमेगा-3 फैटी एसिड्स और चिंता

चिंता विकार दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करता है। चिकित्सक द्वारा लिखी जाने वाली दवाएं रोगियों को अकसर दी जाती हैं, और कुछ दवाओं की आदत लग  सकती है। कुछ लोग कई अन्य विकल्प चाहते हैं। JAMA में 2018 मेटा-विश्लेषण जिसमें 11 देशों के 2240 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था, ने निष्कर्ष निकाला कि ओमेगा-3 फैटी एसिड्स नैदानिक चिंता के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। अन्य अध्ययनों में इसी तरह के निष्कर्ष पाए गए हैं।

ओमेगा-3 फैटी एसिड्स और गठिया

बुढ़ापा होने के साथ, गठिया जोड़ों को प्रभावित कर सकती है, आमतौर पर सुबह जोड़ों में अकड़न और चलने में कठिनाई। कई लोगों में, चलने से दर्द में कमी हो सकती है, लेकिन शरीर में सूजन कम करना महत्वपूर्ण है। ओमेगा-3 मछली का तेल (EPA/DHA) मददगार हो सकता है। मैं अकसर गठिया के लक्षण वाले रोगियों को ओमेगा-3 मछली का तेल की सिफारिश करता हूँ और मैंने इसके अच्छे परिणाम देखें हैं। इससे अक्सर रोगियों को बिना स्टेरायड की इंफ्लेमेटरी द्वाओं (NSAIDs: इबुप्रोफेन, नेप्रोक्सन, डाइक्लोफेनाक) पर निर्भरता कम होती है, जो हृदय और गुर्दे में समस्याओं को बढ़ा सकते हैं।

अध्ययन से पता चलता है कि आवश्यक फैटी एसिड दर्द को कम करने और NSAIDs के उपयोग को कम करने में मदद करते हैं। जब मछली के तेल का रोजाना सेवन किया जाता है, तो अध्ययन में जोड़ की अकड़न में कमी का भी पता चलता है।

ओमेगा-3 फैटी एसिड्स और अस्थमा

अस्थमा फेफड़ों की एक रिवर्सिब्ल इंफ्लेमेटरी बीमारी है जो तब होती है जब फेफड़े के ऊतकों के आसपास की मांसपेशियां संकुचित होने लगती है। दुनिया भर में, इससे 300 मिलियन लोग प्रभावित हैं, जबकि लगभग 250,000 लोग सालाना इस बीमारी से उत्पन्न समस्याओं से अपनी जान गंवा देते हैं। अस्थमा से घरघराहट, खाँसी और सांस की तकलीफ जैसे लक्षण पैदा हो सकते हैं।

वैज्ञानिकों ने अस्थमा से पीड़ित लोगों के रक्त में सूजन बढ़ाने वाले प्रोटीन (IL-17A और TNF- α) को मापा है। शोधकर्ताओं ने हल्के से मध्यम अस्थमा वाले बच्चों में इनके स्तरों में कमी देखी है जिन्हें तीन महीने तक प्रतिदिन 180mg EPA/120mg DHA दिया गया है। इसके अतिरिक्त, 72 प्रतिशत रोगियों में नैदानिक पल्मनेरी कार्य परीक्षण में सुधार हुआ है।

2017 के एक अध्ययन से पता चलता है कि गर्भवती महिलाओं द्वारा मछली के तेल का सप्लीमेंट जन्म के बाद उनके बच्चों में अस्थमा के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है (यदि गर्भवती हो तो इसका उपयोग करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें)। वर्ष 2018 के Pediatric Allergy and Immunology नामक एक अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया है कि “बच्चे के शुरुआती दिनों (6-9 महीने) में मछली की शुरुआत और सभी प्रकार की मछलियों के नियमित सेवन (सप्ताह में कम से कम एक बार) से साढ़े चार साल वर्ष की उम्र तक के बच्चों में अस्थमा और घरघराहट कम हो सकती है जबकि इससे अधिक उम्र के बच्चों में वसायुक्त मछली का सेवन फायदेमंद हो सकता है।”

अंत में, वर्ष 2016 में Nutrition Research Reviews नामक एक अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला है कि ओमेगा-3 मछली के सेवन से अस्थमा पीड़ितों को लाभ मिल सकता है, जबकि वर्ष 2016 में Cytokine नामक एक और अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला है कि ओमेगा-3 अस्थमा के रोकथाम के लिए एक आशाजनक पूरक पद्धति है। अस्थमा की प्राकृतिक पद्धतियों के बारे में और जानें।

ओमेगा-3 फैटी एसिड्स और अवसाद

अवसाद एक आम बीमारी है जो लाखों लोगों को प्रभावित करती है। इसके कई कारण हैं। चिकित्सक द्वारा लिखी दवाएं मददगार हो सकती हैं, लेकिन किसी व्यक्ति के लिए कौन सी दवा सबसे अच्छा से काम करेगी इसके लिए अकसर पहले विभिन्न फोर्मुलों के परीक्षण करने पड़ते हैं। कई लोग वैकल्पिक पद्धतियों की तलाश करते हैं, जिनमें से एक आवश्यक फैटी एसिड लेना है।

2001 के एक अध्ययन से पता चला है कि EPA (आवश्यक फैटी एसिड) गंभीर अवसाद में मदद कर सकता है। वर्ष 2015 में Integrative Medicine Research में एक अध्ययन ने अवसाद के उपचार में ओमेगा-3 मछली के तेल के उपयोग का समर्थन किया है, omega-3 fatty acids. जबकि वर्ष 2017 में अवसाद और चिंता से ग्रस्त 38 बच्चों के अध्ययन से पता चला कि ओमेगा-3 फैटी एसिड दिए जाने पर ज्यादातर अवसाद के लक्षणों में सुधार हुआ। इस अध्ययन में उनकी चिंता के लक्षणों में काफी सुधार नहीं हुआ।  

वयस्कों के 2017 के एक अध्ययन में पाया गया कि यह साबित करने के लिए ओमेगा-3 फैटी एसिड से संबंधित पर्याप्त सबूत नहीं थे कि वे अवसाद वाले लोगों में पर्याप्त रूप से फायदेमंद हो सकते हैं। लेकिन नुकसान का कोई सबूत नहीं था। आगे के मूल्यांकन के लिए अधिक अध्ययनों की आवश्यकता है।

ओमेगा-3 फैटी एसिड्स और आंत का स्वास्थ्य

स्वस्थ आंत समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। आंत-मस्तिष्क आधार को संज्ञानात्मक और समग्र शारीरिक स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए जाना जाता है। वर्ष 2017 में International Journal of Molecular Sciences में एक अध्ययन के अनुसार, ओमेगा-3 फैटी एसिड्स आंत माइक्रोबायोम को संतुलित करने और प्रीबायोटिक प्रभाव प्रकट करने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। वर्ष 2016 के एक पशु अध्ययन से यह भी पता चला है कि ओमेगा-3 फैटी एसिड्स एंटीबायोटिक-प्रेरित परिवर्तनों के खिलाफ आंत की रक्षा कर सकते हैं जिनकी वजह से स्वस्थ आंत के बैक्टीरिया में असंतुलन उत्पन्न हो सकता है।

ओमेगा-3 फैटी एसिड्स और हृदय रोग

हृदय रोग दुनिया भर में लाखों लोगों की जान लेता है। आधुनिक चिकित्सा हृदय रोग से उत्पन्न जटिलताओं को कम करने की उम्मीद में उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह जैसे जोखिम कारकों को कम करने पर केंद्रित है। जिसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड्स भी एक भूमिका निभा सकते हैं।

वर्ष 2013 में Annals of Internal Medicine के एक अध्ययन में 69 से 79 वर्ष की आयु के 2,692 अमेरिकी वयस्क पुरुषों का अध्ययन किया गया जिन्हें पहले कभी हृदय रोग, स्ट्रोक, या कंजेस्टिव हार्ट फेलियर नहीं हुआ था। वर्ष 1992 में पुरुषों के रक्त के फैटी एसिड स्तरों का माप लिया गया था। वर्ष 2008 तक उनके रक्त की जाँच की गई। शोधकर्ताओं ने बताया कि EPA के उच्च स्तर वाले लोगों की मरने की संभावना 17 प्रतिशत और DHA के उच्च स्तर वाले लोगों की की मरने की संभावना 23 प्रतिशत कम थी। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि कुल 3-PUFA के उच्च स्तर संवहनी रोग से मृत्यु के कम जोखिम से संबंधित थे।

वर्ष 2012 में उन लोगों पर एक अध्ययन किया गया जो हार्ट अटैक से पीड़ित थे, शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि जिन लोगों ने ओमेगा-3 फैटी एसिड्स (EPA और DHA) का सेवन किया, उनमें अचानक हृदय की मृत्यु से मरने की संभावना 45 प्रतिशत कम थी, उनमें हृदय रोग में 20 प्रतिशत की कमी थी, और किसी भी कारण से उनके मरने की संभावना 15 प्रतिशत कम थी।

ओमेगा-3 फैटी एसिड्स और उच्च ट्राइग्लिसराइड्स

उच्च ट्राइग्लिसराइड्स हृदय रोग के लिए एक ज्ञात जोखिम कारक हैं। इसलिए, इनके स्तरों को कम करना महत्वपूर्ण है। आवश्यक फैटी एसिड का सेवन करने के अलावा, उन्हें कम करने में मदद करने में आहार महत्वपूर्ण है। फार्मास्युटिकल दवा कंपनियों ने ट्राइग्लिसराइड्स को कम करने के लाभ का सिद्ध किया है और एक फार्मास्युटिकल-ग्रेड मछली का तेल विकसित किया है, जो FDA द्वारा अनुमोदित है। हालांकि, इसकी उच्च लागत के कारण, कई लोग इसका इस्तेमाल करने में असमर्थ हैं। दवा-की-दुकानों पर मिलने वाले मछली के तेल के कैप्सूल इसका शानदार विकल्प हैं।

वर्ष 2016 में Lipids in Health and Disease के एक अध्ययन ने निष्कर्ष निकला कि ओमेगा-3 फैटी एसिड्स ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को कम करने में मददगार हैं। इसके अलावा, वर्ष 2017 में Atherosclerosis के एक मेटा-विश्लेषण अध्ययन, जिसमें 1378 लोगों का अध्ययन किया गया था, से पता चलता है कि तैलीय मछली का सेवन HDL (अच्छे कोलेस्ट्रॉल) के स्तर को कम करते हुए ट्राइग्लिसराइड्स को कम करने में मदद करता है, हृदय रोग के लिए दो महत्वपूर्ण बायोमार्कर।

ओमेगा-3 फैटी एसिड्स और माइग्रेन

माइग्रेन कमजोरी लाने वाले सिरदर्द हैं जिनसे सामान्य जीवन बदल सकता है। ये काम में ध्यान की कमी का प्रमुख कारण भी हो सकते हैं। रोकथाम महत्वपूर्ण है। वर्ष 2017 के एक अध्ययन से पता चलता है कि ओमेगा-3 फैटी एसिड्स माइग्रेन की सिरदर्द के उपचार में मददगार हो सकते हैं, संभवतः मस्तिष्क में सूजन को कम करके। माइग्रेन संबंधी सिरदर्द के लिए प्राकृतिक पद्धतियों के बारे में और जानें।

ओमेगा-3 फैटी एसिड्स और सोरायसिस

सोरायसिस एक पुरानी सूजन-संबंधी त्वचा की अवस्था है जो आम तौर पर त्वचा के उठे हुए सूखे पैच के साथ सामने आती है। इससे प्रभावित लोगों को बहुत कठिनाई हो सकती है। चिकित्सक द्वारा लिखी गई दवाएं मददगार हो सकती हैं, लेकिन कभी-कभी इनके गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं।  नतीजतन, अकसर प्राकृतिक उपचारों की तलाश की जाती है। ऐसे खाद्य पदार्थों से बचने के अलावा, जिनसे इसमें वृद्धि हो सकती है, जैसे कि दुग्ध उत्पाद या गेहूं, ओमेगा-3 फैटी एसिड्स कई लोगों के लिए एक लोकप्रिय विकल्प बन गया है।

वर्ष 2018 में Scientific Reports के एक अध्ययन से पता चलता है कि Resolvin E1, एक ओमेगा-3 मेटाबोलाइट, उस प्रक्रिया की व्याख्या कर सकता है जिसके द्वारा ओमेगा-3 फैटी एसिड्स सोरायसिस वाले लोगों की मददगार हो सकते हैं।

वर्ष 2015 में Journal of the American Academy of Dermatology के एक अध्ययन नें 15 अध्ययनों की समीक्षा की और पाया कि इनमें से 12 अध्ययनों से पता चला है कि ओमेगा-3 फैटी एसिड्स लाभकारी थे, जबकि थीं परीक्षणों ने दर्शाया कि इनसे कोई लाभ नहीं हुआ।

शोध के आधार पर, सोरायसिस से पीड़ित लोगों के लिए ओमेगा-3 उपचार आजमाना विवेकपूर्ण प्रतीत होता है। कुछ लोगों में विटामिन डी के साथ ओमेगा-3 फैटी एसिड्स लेने पर अतिरिक्त सुधार देखे हैं।  EPA/DHA संयोजन की अनुशंसित ओमेगा-3 फैटी एसिड्स की खुराक प्रति दिन 2,000mg से 10,000mg प्रति दिन तक होती है।

ओमेगा-3 फैटी एसिड्स और आमवात

आमवात एक स्व-प्रतिरक्षा स्थिति है जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली जोड़ों पर हमला करती है, विशेष रूप से उपास्थि और यहां तक कि हड्डी पर, जिसके परिणामस्वरूप गंभीर और अक्सर कमजोर करने वाली गठिया दर्द होती है। जबकि तीन में से एक व्यक्ति, जो चिकित्सक द्वारा लिखी दवाएं लेते हैं, उनमें सुधार देखने को मिल सकता है, कई लोग दीर्घकालिक दुष्प्रभावों के बारे में चिंतित हैं और लक्षणों को कम करने के लिए अधिक प्राकृतिक पद्धतियों की तलाश करते हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड एक ऐसी वैल्क्ल्पिक चिकित्सा हो सकती है।

वर्ष 2010 के एक अध्ययन में आमवात वाले लोगों में दर्द और जोड़ों की सूजन को कम करने में मदद करने में ओमेगा-3 मछली के तेल की प्रभावशीलता को साबित किया गया। वर्ष 2016 में Global Journal of Health Science के एक अध्ययन में उन लोगों का मूल्यांकन किया गया जो आमवात के लिए DMARDs (डिजीज-मॉडिफाइंग एंट-रूमेटिक ड्रग्स) ले रहे हैं। प्लेसीबो पिल की तुलना में, ओमेगा-3 फैटी एसिड लेने वाले लोगों ने अपने लक्षणों में महत्वपूर्ण सुधार, गतिशीलता में वृद्धि और कम दर्द का उल्लेख किया। वर्ष 2015 में Annals of Rheumatic Diseases के एक अध्ययन में यह भी पता चला है कि जो लोग आमवात के लिए पारंपरिक उपचार ले रहे थे उनके आहार में मछली के तेल को शामिल करने से उनके लक्षणों में सुधार हुआ।

A 2019 study did not show any evidence of that high intake of fish or fish oil prevented the onset of rheumatoid arthritis. At this point, it appears its main benefit is in the treatment once already diagnosed. वर्ष 2019 के एक अध्ययन में मछली या मछली के तेल के उच्च सेवन से ऐसे किन्हीं भी साक्ष्यों का पता नहीं चला जो आमवात को शुरुआत से रोकते हों। इस स्थिति में, यह प्रतीत होता है कि इसका मुख्य लाभ आमवात के उपचार में होता है आमवात को रोकने के लिए नहीं।

ओमेगा-3 फैटी एसिड्स और अभिघातज मस्तिष्क की चोट

अभिघातज मस्तिष्क की चोट (TBI) के बारे में पिछले एक दशक में काफी कुछ समझ में आया है। पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ियों में मस्तिष्काघात के कारण होने वाली कई जटिलताओं के कारण इसका पता लग पाया है। विस्फोट संबंधी चोटों के संपर्क में आने से सैनिक भी TBI से प्रभावित हुए हैं।

वैज्ञानिकों ने सिद्ध किया है कि मस्तिष्क में चोट लगने पर सूजन आ जाती है। इससे ऑक्सीडेटिव क्षति होती है और उत्तेजक अमीनो एसिड में वृद्धि होती है। वर्ष 2012 में American Journal of Emergency Medicine के एक अध्ययन से पता चला है कि आरंभिक स्थिति में ओमेगा-3 फैटी एसिड्स देने से होने वाली सूजन को कम करने में मदद मिल सकती है, जिससे बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

वर्ष 2016 में Journal of The American College of Nutrition के एक अध्ययन ने ओमेगा-3 फैटी एसिड्स के समग्र सुरक्षा प्रोफ़ाइल की चर्चा की और बताया कि इन्हें अभिघातज मस्तिष्क की चोट के लिए प्रथम उपचार माना जाता है। ऐसा खिलाड़ियों, सनिकों या दुर्घटनाग्रस्त लोगों के लिए माना जाता है।

दुष्प्रभाव या रक्तस्राव जोखिम?

चिकित्सक आमतौर पर मरीजों को सर्जरी से पहले मछली के तेल का सेवन रोकने की सलाह देते हैं। वर्ष 2017 के एक अध्ययन के अनुसार जिसने 52 अन्य अध्ययनों का अवलोकन किया, ऐसा आवश्यक नहीं है क्योंकि सर्जरी के दौरान या बाद में रक्तस्राव के जोखिम में वृद्धि नहीं होती है जिस के लिए मछली के तेल की खुराक को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इसके बावजूद, फिर भी आपको अपने चिकित्सक की सिफारिशों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

कुछ लोगों को मछली के तेल की खुराक से थोड़ा अपच भी हो सकता है। यदि ऐसा है, तो किसी अलग ब्रांड पर विचार किया जा सकता है।

सुझाई गई खुराक:

अधिकांश लोग प्रति दिन 500 mg से 4,000 mg तक का मछली के तेल का सेवन करते हैं। यदि उच्च खुराक ले रहे हैं, तो आधी खुराक सुबह और आधी खुराक शाम को लेनी चाहिए। EPA/DHA के शाकाहारी विकल्प भी मौजूद हैं। मछली का तेल तरल रूप, कैप्सूल और यहां तक कि चिंगम के रूप में भी उपलब्ध है।

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