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मिल्क थिसल: लीवर को स्वस्थ रखने के लिए सबसे अच्छा सप्लीमेंट

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‌‌‌‌शरीर में लीवर की क्या भूमिका है?

लीवर शरीर का सबसे बड़ा ठोस, अंदरूनी अंग है। यह पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में मौजूद है और 6 इंच चौड़ा है, और इसका वज़न लगभग 3 पाउंड है। इसमें कोई हैरानी नहीं है कि लीवर शरीर में एक अहम भूमिका निभाता है क्योंकि यह रोज़ाना के कई अलग-अलग ज़रूरी कामों में शामिल होता है।

खाने को पचाने, अवशोषित करने और प्रोसेस करने के लिए लीवर दूसरे अंगों के साथ मिलकर काम करता है। यह ग्लूकोज़, या शुगर, को स्टोर करके रखने में शामिल होता है, जिसे तब इस्तेमाल किया जाता है जब शरीर को ज़्यादा ऊर्जा चाहिए होती है। यह बाइल का उत्पादन करता है, जो खाने में मौजूद वसा को पचाने, और विटामिन डी, और  समेत वसा में घुलनशील विटामिनों को सोखने में मदद करने वाला एक पदार्थ है। 

लीवर उन पदार्थों का उत्पादन करता है जो खून के थक्के बनने और लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण को नियंत्रित करने में शामिल होते हैं। गुर्दों के साथ-साथ, लीवर भी शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने वाले अहम अंगों में से एक है। यह दवाओं और शराब को पचाने के साथ-साथ पर्यावरण में मौजूद विषैले तत्वों और रसायनों समेत हानिकारक पदार्थों को शरीर से निकालने का काम करता है। जब लीवर कमज़ोर हो जाता है, तो इन प्रक्रियाओं पर बुरा असर पड़ सकता है।

कई कारक लीवर के काम और स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकते हैं। इनमें बहुत ज़्यादा शराब पीना, मोटापा, विषैले पदार्थों के संपर्क में आना, कुछ दवाएँ और वायरल संक्रमण शामिल हैं। हमारी खुशनसीबी है कि शरीर के किसी भी दूसरे अंग के मुकाबले लीवर में अपने आप दोबारा बनने की क्षमता सबसे ज़्यादा है। एक ख़ास जड़ी-बूटी लीवर को सुरक्षा देने की अपनी खूबियों और स्वास्थ्य लाभों के लिए जानी जाती है।

‌‌‌‌मिल्क थिसल क्या है? 

मिल्क थिसल उन जड़ी बूटियों में से एक है जिस पर सबसे ज़्यादा अध्ययन किया गया है और जो लीवर को सुरक्षा और मदद देने के लिए जानी जाती है। अपने वैज्ञानिक नाम, सिलिबम मैरिएनम, से भी जाना जाने वाला मिल्क थिसल एक जड़ी-बूटी वाला पौधा है जिसे सदियों से लीवर की मदद करने के लिए सप्लीमेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। इस पौधे को पहली बार पहली शताब्दी में इस्तेमाल किया गया था जब यूनानी चिकित्सक डियोस्कोरीडिस का मानना था कि इस पौधे में साँप के काटने का इलाज करने के गुण मौजूद हैं। ऐतिहासिक रूप से, इसे लीवर और पित्ताशय की थैली की बीमारियों में एक सप्लीमेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है।

मिल्क थिसल एस्टेरेसियाए परिवार का एक सदस्य है, जिस परिवार के पौधों में सूरजमुखी, रैगवीड, और गुलबहार भी आते हैं। मिल्क थिसल की 200 से ज़्यादा प्रजातियाँ हैं। कुछ प्रजातियाँ छह फ़ीट तक लंबी हो सकती हैं और उन पर रंग-बिरंगे फूल लगते हैं। अपने नाम के उलट, मिल्क थिसल गाय से नहीं मिलता। बल्कि, इसमें कोई दुग्ध पदार्थ नहीं होता। इसका यह नाम फूल पर मौजूद सफ़ेद धब्बों की वजह से पड़ा है। इस पौधे के तने में भी दूधिया रस होता है। यह पौधा मूल रूप से दक्षिणी यूरोप का है और संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, और ऑस्ट्रेलिया में भी मिलता है।

‌‌‌‌मिल्क थिसल इतना उपयोगी क्यों है?

मिल्क थिसल का सक्रिय घटक सिलीमैरिन नाम का एक वनस्पति यौगिक होता है, जिसमें सिलीबिन या सिलीबिनिन होता है। सिलीमैरिन इस पौधे के बीज में पाया जाता है। ग्लूटाथियोन के बढ़े हुए स्तर की वजह से ऐसा माना जाता है कि इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं।

ग्लूटाथियोन  शरीर में बनने वाला एक ताकतवर एंटीऑक्सिडेंट है जो फ़्री रेडिकल से लड़ने और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। उम्र के साथ कुदरती तौर पर और बार-बार विषैले पदार्थों के संपर्क में आने से ग्लूटाथियोन का स्तर घट जाता है। शोध से पता चला है कि यह डिटॉक्सिफ़िकेशन प्रक्रिया में मदद करके शरीर की सहायता कर सकता है, जिसमें लीवर के ज़रिए शरीर से विषैले पदार्थों को निकाल दिया जाता है। माना जाता है कि सिलीमैरिन एंटीऑक्सिडेंट का काम करता है जो स्वस्थ लीवर कोशिकाओं की मदद करने, उन्हें बनाए रखने और दोबारा बनाने में मदद करता है।

‌‌‌‌मिल्क थिसल के बारे में शोध क्या कहता है?

मिल्क थिसल के उपयोग पर मिले-जुले अध्ययन हुए हैं। कुछ अध्ययनों से पता चला है कि मिल्क थिसल लीवर, गुर्दों और पाचन तंत्र को एंटीऑक्सीडेंट की सुरक्षा दे सकता है। ऐतिहासिक रूप से, मिल्क थिसल का उपयोग आमतौर पर लीवर से जुड़ी समस्याओं के लिए किया जाता है, जैसे कि वायरल हेपेटाइटिस, सिरोसिस, और फैटी लीवर।

सिरोसिस का मतलब है लीवर में ज़ख्म होना। अध्ययनों से पता चलता है कि मिल्क थिसल में जलन-रोधी गुण हो सकते हैं क्योंकि यह सूजे हुए मार्ग की सूजन को कम कर सकता है।

कई अध्ययनों से पता चला है कि यह जड़ी-बूटी लीवर के एंज़ाइम को कम करने में उपयोगी हो सकती है जो वायरल हेपेटाइटिस और शराब ना पीने वालों में फैटी लीवर रोग की वजह से बढ़ जाते हैं।

कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि मिल्क थिसल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को स्वस्थ बनाए रखने में भी मददगार हो सकता है, ख़ासकर टाइप 2 मधुमेह रोगियों में, क्योंकि लीवर ही कोलेस्ट्रॉल बनाता और पचाता है। सिलीमैरिन से सेहत को जलन-रोधी फ़ायदे भी हो सकते हैं।

सिलीमैरिन को मशरूम के ज़हर की काट के तौर पर उपयोग किया जा चुका है। मशरूम से इंसानों को होने वाली बीमारियों में से 95% के लिए डेथ कैप मशरूम, या ऐमानिटा मशरूम, ज़िम्मेदार होता है। यह पूरे यूरोप में बड़े पैमाने पर मिलता है और संयुक्त राज्य अमेरिका के कुछ क्षेत्रों और दुनिया के दूसरे हिस्सों में पाया जा सकता है। यह ऐमाटॉक्सिन नामक एक ज़हर छोड़ता है, जो शुरू में पेट ख़राब कर देता है। एक से तीन हफ़्ते के दौरान, इस ज़हर से लीवर को नुकसान पहुँच सकता है और लीवर फ़ेल हो सकता है, जिससे मौत हो सकती है, चाहे लक्षण ना भी दिख रहे हों। अध्ययनों से पता चला है कि ऐमानिटा के ज़हर के पीड़ितों के लिए मिल्क थिसल सप्लीमेंट असरदार साबित हो सकता है।

‌‌‌‌मिल्क थिसल की ख़ुराक

आमतौर पर मिल्क थिसल को मुँह से लेना सुरक्षित माना जाता है। सप्लीमेंट कैप्सूल, पाउडर, और अर्क में रूप में पाया जा सकता है। उसमें सक्रिय घटक की मात्रा उसे बनाने के तरीके पर निर्भर करती है। आमतौर पर, ख़ुराक अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन वे 150-300 मिलीग्राम तक होती हैं, जो रोज़ दो बार ली जाती है। कुछ लोगों ने पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ने की शिकायत की है जिसमें मतली, उल्टी और दस्त लगना शामिल हैं। रैगवीड एलर्जी से पीड़ित लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। कोई भी नया हेल्थकेयर रूटीन शुरू करने से पहले हमेशा चिकित्सक से परामर्श करें।

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