भारी धातुओं को अपने शरीर से निकालें
शायद आपको पता नहीं है, लेकिन आप हर रोज़ विषैले तत्वों के संपर्क में आते हैं, जिनमें शामिल हैं, संखिया, सीसा, पारा और कैडमियम।
2017 के एक अध्ययन के अनुसार, “भारी धातुओं का लगातार प्रदूषण अपने विषैले प्रभावों के कारण वातावरण में मौजूद सभी तरह के जीवों के लिए प्रमुख खतरा पैदा करता है।”. पिछले 100 वर्षों से, इन भारी धातुओं और अन्य विषैले तत्वों का उपयोग औद्योगिक रूप से किया जा रहा है और उन्होंने हमारी जल और खाद्य आपूर्ति, हवा और यहाँ तक कि हमारे घर के वातावरण में भी प्रवेश पा लिया है। सेवन के बाद, भारी धातुएं हमारे ऊतकों और अवयवों में जमा हो जाती हैं जहाँ वे स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती हैं।
प्रत्येक व्यक्ति के शरीर में भारी धातुएं किसी न किसी मात्रा में मौजूद हैं। उनसे पूरी तरह से बचने का कोई तरीका नहीं है। तथापि हम आहार, पोषण और जीवनशैली में परिवर्तन करके उनसे संपर्क (या अरक्षितता) को कम करने और उत्सर्जन को बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं।
100 वर्ष पहले, अमेरिका, रूस, जापान और चीन में कैंसर दुर्लभ था। तथापि, अब कैंसर विश्व भर में मृत्यु का अग्रणी कारण है। 2006 के एक अध्ययन के अनुसार इस बात का प्रमाण है कि भारी धातुओं से संपर्क कैंसर की घटनाओं में वृद्धि में भूमिका निभाता है, जैसे संखिया और मूत्राशय का कैंसर। 2013 के एक अध्ययन के अनुसार भारी धातुओं से संपर्क की समस्या अफ्रीका में भी बढ़ रही है।
बीसवीं सदी के आरंभ में, अमेरिका की 3 प्रतिशत आबादी को कैंसर था। 1950 तक, 20 प्रतिशत अमरीकी आबादी को कैंसर हो गया था। 2000 तक, 38 प्रतिशत आबादी कैंसर से ग्रस्त थी। डॉक्टरों का अनुमान है कि 2020 तक 2 व्यक्तियों में से 1 को उनके जीवन में किसी समय जीवन के लिए खतरनाक कैंसर से ग्रस्त पाया जाएगा।
हालांकि, कई सरकारें अधिक सख्त पर्यावरण संबंधी मानकों और प्रदूषण विनियमों के साथ अरक्षितता को कम करने की दिशा में काम कर सकती हैं, हमें न केवल भारी धातुओं के संपर्क से बचने, बल्कि अपने शरीर को प्राकृतिक सफाई प्रक्रियाओं को इष्टतम करने के लिए भी पूरा जोर लगाना चाहिए। हमारे शरीर में निराविषीकरण करने की एक सहज क्षमता होती है।
विषाक्तता के संपर्क में आने के लक्षण
भारी धातुओं के संपर्क में आने के लक्षणों में नगण्य लक्षणों से लेकर सामान्य या कभी-कभी गंभीर लक्षण शामिल हैं। हम में से सभी भारी धातुओं के संपर्क में आते हैं, और हमारा लक्ष्य एक सोचे-समझे तरीके का उपयोग करके उनकी पहचान करना, उनकी मात्रा को घटाना, और उन्हें हमारे शरीर से निकालना होना चाहिए।
हालिया या दीर्घकालिक अरक्षितता के लक्षणों में ये शामिल हो सकते हैं, लेकिन वे इन तक ही सीमित नहीं हैं:
- पुरानी खांसी
- दीर्घकालिक थकावट
- संज्ञानात्मक ह्रास / भ्रम
- दस्त
- चक्कर आना
- कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण बार-बार संक्रमण होना
- सिरदर्द
- मांसपेशियों में दर्द
- नाक के पिछवाड़े में स्राव / श्लेष्मा से स्राव
- सांस फूलना
अरक्षितता से बचें
डॉ. जोसेफ पिज़ोमो 2017 में प्रकाशित अपनी पुस्तक The Toxin Solution में कहते हैं कि औसत इंसान को विषैले तत्वों, रसायनों से लदे खाद्य पदार्थों, पेंट, प्रिटिंग इंक, फ्लेम रिटार्डैंट्स, कूलैंट्स, और लकड़ी के फर्श की फिनिश से लेकर स्कॉचगार्ड से उपचारित कपड़ों से बेंजीन और रसायनों [तथा भारी धातुओं] का लगातार सामना करना पड़ता है…”। हमारे पास इससे पूरी तरह से बचने का कोई विशेष तरीका नहीं है।
पहला चरण है हमारे शरीर द्वारा सेवन किए जाने वाले खाद्य पदार्थों और उस वातावरण के प्रति सजग रहना जहाँ हम अपना जीवन बिताते हैं। अरक्षितता को कम करने या उससे बचने के लिए सभी संभव सावधानियाँ बरतना महत्वपूर्ण है। कहा जाता है कि जहर और दवाई के बीच फर्क केवल खुराक का है। यही बात उन गैर-औषधि रसायनों पर भी लागू होती है जिनसे हमारा संपर्क होता है। जबकि 100% बचाव शायद संभव न हो, संपर्क की खुराक को कम करने से स्वास्थ्य को इष्टतम करने में मदद मिल सकती है।
भारी धातुओं वाले आम विषैले तत्वों में शामिल हैं:
संखिया
कीटनाशकों के उत्पादन में अक्सर उपयोग किया जाता है। जॉन्स हॉपकिंस की एक रिपोर्ट के अनुसार, संदूषण के आम स्रोतों में शामिल हैं, पेयजल, सिगरेट और व्यावसायिक रूप से उत्पादित चिकन जैसे खाद्य पदार्थ। शरीर में इसके स्तरों के बढ़ने के साथ, संखिया को स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा जाता है, जिनमें शामिल हैं, मधुमेह का अधिक जोखिम, थकावट, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, आंत्र संबंधी रोग, मानसिक गड़बड़ी, उंगलियों के नाखूनों पर सफेद धारियाँ (मीस लाइन्स) और त्वचा की जलन। गंभीर मामलों में, इसके कारण कोशिकीय विषाक्तता और मृत्यु भी हो सकती है।
सीसा
सीसा एक भारी धातु है। लैटिन शब्द plumbum है, जहाँ से हमें plumber शब्द प्राप्त होता है। सीसा उद्योग, बैटरी उद्योग के कार्मिकों, वेल्डरों और सोल्डरों को इसके संपर्क में आने का अधिक जोखिम होता है। मेरा एक मरीज़ है जो प्रतिस्पर्धात्मक निशानेबाज (शूटर) था और खुद अपनी गोलियाँ बनाया करता था। जब हमने उसके रक्त में सीसे के स्तरों की जाँच की, तो उन्हें बढ़ा हुआ पाया। संपर्क के अन्य स्रोतों में सीसे के पाइप, मिट्टी, प्रदूषित पानी हैं। फ्लिंट, मिशीगन में, सार्वजनिक जलापूर्ति में सीसा एक बड़ा मुद्दा है जो समुदाय के लिए स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं प्रस्तुत करता है।
1920 के दशक से लेकर 1990 के दशक तक, दुनिया की कई जगहों में सीसे से युक्त गैसोलीन का उपयोग किया जाता था। 2011 तक, अधिकांश देशों ने पेट्रोलियम में सीसा मिलाने पर प्रतिबंधित कर दिया। अमेरिका में, 1978 से पहले बनी इमारतों पर लगे पेंट में सीसा है। पुराने घरों में रहने वाले बच्चों को इसके संपर्क में आने का जोखिम अधिक है।
अध्ययनों के अनुसार, जब बच्चे इसके संपर्क में आते हैं, तो उनका मानसिक और शारीरिक विकास प्रभावित हो सकता है। रक्त में सीसे के बढ़े हुए स्तर का संबंध बौद्धिक स्तर (आईक्यू) की कमी से जो़ड़ा गया है। विषैले प्रभावों में न्यूरोपैथी, याददाश्त के मुद्दे, गुर्दे का रोग, कैंसर के जोखिम में वृद्धि और रक्त की समस्याएं, जैसे एनीमिया शामिल हैं।
पारा
पारा वातावरण में सर्वव्यापी है। रक्त के स्तरों में वृद्धि याददाश्त की हानि, महीन कंपनों जैसे तंत्रिकातंत्रीय लक्षण पैदा कर सकती है या उनमें योगदान कर सकती है। साथ ही, इससे दीर्घकालिक गुर्दा रोग, रक्तचाप में वृद्धि, हृदय रोग इत्यादि का जोखिम बढ़ सकता है।
पारे की अधिकता वाली मछलियों का उपभोग भी समस्यात्मक है। इनमें किंग मैकेरेल, स्वोर्डफिश अहि तुना और मैर्लिन शामिल हैं। पारे की कम मात्रा वाली मछलियाँ कैटफिश, फ्लाउंडर, सामन, ट्राउट, हेरिंग और सार्डीन्स हैं और वे, खास तौर पर गर्भवती स्त्रियों और बच्चों के लिए बेहतर विकल्प हैं।
इसके अलावा, कई लोग अपने मुंह में “चांदी की फिलिंग” डलवाते हैं। ये कई बार पारे और चांदी के मिश्रण से बनी होती हैं। तथापि, पारा “ऑफ-गैसिंग” के रूप में रक्त प्रणाली में मुक्त हो सकता है। पारे की फिलिंग निकालने के लिए इस काम में पारंगत दंत-चिकित्सक की सहायता लें। यदि यह काम ठीक से नहीं किया जाता है, तो उसे निकालने के समय भी आप पारे की बड़ी मात्रा के संपर्क में आ सकते हैं, जो बहुत खतरनाक हो सकता है।
कैडमियम
कैडमियम एक भारी धातु है, जो बैटरियों जैसी घरेलू वस्तुओं में आम है। जो लोग बैटरी उद्योग में काम करते हैं, इलेक्ट्रोप्लेटिंग करते हैं, या वेपर लैंपों के करीब रहते हैं, उनके इसके संपर्क में आने का अधिक जोखिम होता है। तंबाकू पीने वाले लोग भी पी गई प्रत्येक सिगरेट के साथ कैडमियम का सेवन करते हैं। इसके बढ़े हुए स्तर ऑस्टियोपेनिया, ऑस्टियोपोरोसिस, फेफड़े और गुर्दे के रोग का जोखिम बढ़ाते हैं। लघुकालिक अरक्षितता को सिरदर्द, मतली, उल्टी, पेट की मरोड़ और दस्तों से जोड़ा जाता है। इसका संबंध सांस लेने की समस्याओं और फेफड़ों में तरल के जमाव से भी है।
अन्य भारी धातुओं, जो स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती हैं, में अल्युमिनियम और क्रोमियम के विषैले स्वरूप (क्रोमियम पिकोलिनेट के लाभदायक स्वरूप से भिन्न)। शामिल हैं।
जाँच कैसे करें
यदि आप भारी धातुओं से अरक्षितता के बारे में चिंतित हैं, तो अपने चिकित्सक से परामर्श लें। यह देखने के लिए रक्त जाँचें, मूत्र परीक्षण और कभी-कभी बालों का विश्लेषण किया जा सकता है कि क्या आपके शरीर में भारी धातुओं के चिंताजनक स्तर हैं।
अपने शरीर को शुद्ध करें
भारी धातुओं और विषैले तत्वों को हटाने के लिए अपने शरीर को शुद्ध करने हेतु आप कुछ चीजें कर सकते हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
अपने आहार को सुधारें
उपवास करना शरीर का निराविषीकरण करने में मदद करने वाले सबसे कारगर और सस्ते तरीकों में से एक है। किसी विशिष्ट समयावधि तक भोजन या खाद्य वस्तुओं से दूर रहने की सरल क्रिया शरीर को अवांछित पदार्थों का निष्कासन करने का अवसर देती है।
रसायनिक संपर्क से बचने के लिए ऑर्गैनिक फल और सब्ज़ियाँ तथा हारमोन-रहित, घास से पोषित पोल्ट्री और गोमांस खाना (आपकी क्षमता की हद तक) महत्वपूर्ण है। अधिक पारे वाली मछलियों का सेवन सप्ताह में एक से ज्यादा बार मत करें।
प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों और अत्यधिक शक्कर वाले भोजन से बचें। कृत्रिम स्वीटनर्स और अधिक फ्रक्टोज़ वाले कॉर्न सिरप से बचें क्योंकि वे आपके शरीर के चयापचय और निराविषकारी पथों पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं।
पेट के स्वास्थ्य को इष्टतम बनाएं
हमारी आंतें विषैले तत्वों के हमारे शरीर में प्रवेश करने के मुख्य रास्ते हैं। इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम, दीर्घकालिक दस्त, कब्ज़, पेट फूलने जैसी पेट की समस्याओं वाले लोगों में अक्सर एक विकार होता है जिसे रिसने वाला पेट (Leaky Gut) कहते हैं, जिसके कारण अवशोषण की तकलीफें होती हैं। आंत्र के अवरोध की खराबी के फलस्वरूप रसायनों और भारी धातु वाले विषैले तत्वों का अवशोषण बढ़ जाता है। हम पेट के स्वास्थ्य को इष्टतम बनाने के लिए इनका उपयोग कर सकते हैं: प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स। साथ ही, कुछ लोगों को गेहूं, डेयरी या मक्के जैसे उत्तेजक खाद्य पदार्थों से दूर रहने से मदद मिल सकती है। बड़ी मात्रा में फलों और सब्ज़ियों का उपभोग भी उपयोगी हो सकता है।
यकृत के स्वास्थ्य को इष्टतम बनाएं
यकृत का काम हमारे रक्त से भारी धातुओं और अन्य विषैले तत्वों को हटाना है। हमारा यकृत रक्त का निराविषीकरण करने के लिए असंख्य रसायनिक प्रतिक्रियाएं करता है। ऐसा करने के लिए कतिपय पोषक तत्वों की जरूरत पड़ती है। निराविषीकरण करने का प्रयास करते समय शराब के उपभोग को सीमित करें या उससे परहेज करें।
निराविषकारी पूरक
प्राथमिक पूरक
- NAC (एन-एसिटाइल सिस्टीन) – 500 मिग्रा दिन में दो बार कम से कम 8 सप्ताह तक, फिर रोज़ाना एक बार
- क्लोरेला – 1 से 4 ग्राम प्रतिदिन
- मिल्क थिसल – 150 से 300 मिग्रा प्रतिदिन
- स्पिरुलिना – लेबल पर दिए निर्देशानुसार
अतिरिक्त समर्थन
- फोलिक एसिड – 800 माइक्रोग्राम रोज़ाना। अलग पूरक के रूप में या किसी उत्तम मल्टीविटामिन में लिया जा सकता है
- सेलेनियम – 200 माइक्रोग्राम रोज़ाना एक अलग पूरक के रूप में या किसी उत्तम मल्टीविटामिन में लिया जा सकता है
- विटामिन बी12 – 2,000 माइक्रोग्राम रोज़ाना। अलग पूरक के रूप में या किसी उत्तम मल्टीविटामिन में लिया जा सकता है
- विटामिन सी – 500 से 2,000 मिग्रा प्रतिदिन।
- जस्ता – 25 मिग्रा रोज़ाना। अलग पूरक के रूप में या किसी उत्तम मल्टीविटामिन में लिया जा सकता है
गुर्दे की गतिविधि को इष्टतम बनाएं
गुर्दे रक्त को फिल्टर करने के लिए ज़िम्मेदार हैं और ऐसा करते समय, वे भारी धातुओं, विषैले तत्वों, और चयापचय संबंधी अपशिष्ट को हटाते हैं। शोध के अनुसार, इष्टतम गुर्दा प्रकार्य को बहाल करने और निराविषीकरण करने में मदद करने में निम्नलिखित 15 खाद्य वस्तुएं और पूरक मददगार हो सकते हैं।
- चुकंदर का रस
- ब्लूबेरीज़
- करक्यूमिन (मसाले या पूरक के रूप में ले सकते हैं)
- लाल शिमला मिर्च
- पत्ता गोभी
- लहसुन (उपलब्धता: जड़ी-बूटी या पूरक)
- प्याज
- केल
- फूलगोभी
- अदरक (उपलब्धता: जड़ी-बूटी या पूरक)
- चॉकलेट (75% कोको या अधिक)
ऐसे पूरक जो गुर्दे के स्वास्थ्य के संरक्षण और निराविषीकरण प्रक्रिया में मदद कर सकते हैं
- एल-आर्जिनीन पूरक लेबल पर दिए निर्देशानुसार
- जिंकगो बिलोबा लेबल पर दिए निर्देशानुसार
- गोटू कोला 950 मिग्रा रोज़ाना दो बार
- मल्टीविटामिन लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार लें
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