ऊर्जा बढ़ाने के लिए 10 सबसे अच्छे पूरक
मेरी ऊर्जा हमेशा कम क्यों रहती है?
सीधा-सी बात है; यदि हम में ऊर्जा कम है, तो इसका मतलब कि हमारा शरीर जितनी ऊर्जा बना सकता है, हम उससे अधिक ऊर्जा उपयोग कर रहे हैं। वैज्ञानिक दुनिया में, शोध कम ऊर्जा के दो मुख्य संभावित कारण बताते हैं: ऊर्जा की एक बड़ी मात्रा शरीर की किसी सूजन-संबंधी प्रतिक्रिया से लड़ने में उपयोग हो रही है या शरीर कुशलतापूर्वक हमारे भोजन से ऊर्जा का उत्पादन नहीं कर पा रहा है।
कम ऊर्जा के इन संभावित कारणों के बीच एक संबंध है। अक्सर, सूजन-संबंधी प्रतिक्रिया बहुत अधिक होने से हमारा चयापचय कम कुशल तरीके से ऊर्जा उत्पन्न करने लगता है। सूजन-संबंधी प्रतिक्रिया बहुत अधिक होने का सहसंबंध या संबंध गंभीर बीमारियों से भी हो सकता है। इसलिए, यदि आप किसी तरह से बीमार हैं, तो हो सकता है कि आप सामान्य से बहुत अधिक ऊर्जा की खपत कर रहे हों।
एक बहुत बड़ा “ऊर्जा चोर” हमारा तनाव हार्मोन कॉर्टिसोल है। उच्च होने पर, कॉर्टिसोल यकृत को ग्लाइकोजन नामक संचित शर्करा को तोड़ने के लिए उत्तेजित करता है और उसे हमारे मस्तिष्क या मांसपेशियों में पुन: प्रवाहित कर देता है, जो शर्करा को तोड़कर ऊर्जा में बदल देते हैं। इस तरह हम तनाव पैदा करने वाले किसी भी कारक के प्रति अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि हम तय समय पर काम पूरा करने के लिए रात 2 बजे तक काम करने की योजना बनाते हैं, तो हमारे मस्तिष्क को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
बढ़ा हुआ कॉर्टिसोल भी सूजन-संबंधी प्रतिक्रिया बहुत अधिक होने का कारण बन सकता है। उच्च कॉर्टिसोल से सूजन पैदा कर सकने वाले साइटोकाइन्स का स्त्राव होने लगता है। ये अणु सूजन-संबंधी प्रतिक्रिया की तीव्रता को बढ़ा सकते हैं, जिससे हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रतिरक्षा कोशिकाओं को काम पर लगाने या बनाने का संकेत मिलता है, जिसमें फिर अधिक ऊर्जा का उपयोग होता है।
इसी संदर्भ में, यदि हम अपने सर्केडियन रिदम, यानी रात 11 बजे के आसपास सोने जाने और सुबह 7 बजे उठने के हमारे शरीर के प्राकृतिक संकेतों, का सम्मान नहीं करते या यदि हम रात को करवटें बदलते रहते हैं, तो हमारे कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ सकता है और ऊपर बताया गया कम ऊर्जा का चक्र शुरू हो सकता है।
शरीर ऊर्जा का उत्पादन कैसे करता है?
शरीर में ऊर्जा का मुख्य वाहक, यानी एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट (एटीपी), एक कार्बनिक यौगिक है जो हमारे शरीर की हर कोशिका में मौजूद होता है। माइटोकॉन्ड्रिया, जो कोशिका का बिजलीघर माना जाने वाला एक अंगक है, हमारे भोजन से ऊर्जा बनाने का काम करता है। प्राकृतिक रूप से उम्र बढ़ने या यहां तक कि अपने खुद के ऊर्जा उत्पादन के साथ, माइटोकॉन्ड्रिया प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियों (आरओएस) नामक हानिकारक अणुओं का उत्पादन कर सकता है। ये अणु हमारे माइटोकॉन्ड्रिया को नुकसान पहुंचाकर ऊर्जा उत्पादन को कम कर सकते हैं। आज बहुत-सा विज्ञान हमारे माइटोकॉन्ड्रिया को स्वस्थ रखने पर केंद्रित है क्योंकि उन्हीं से सबकुछ चलता है।
हमारे भोजन से मिलने वाली ऊर्जा की गुणवत्ता में आहार एक बड़ी भूमिका निभा सकता है और सूजन-संबंधी प्रतिक्रिया को स्वस्थ रखने में सहायक या रूकावट बन सकता है। जिस आहार में मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट शामिल हों उसे कम पोषक आहार माना जाता है, क्योंकि इस तरह का आहार लेने वाले लोग आमतौर पर प्रोटीन और वसा जैसे मैक्रोन्यूट्रिएंट्स में पाए जाने वाले महत्वपूर्ण विटामिन और पोषक तत्व लेने से चूक जाते हैं। उच्च कार्बोहाइड्रेट वाला आहार सूजन-संबंधी प्रतिक्रिया को बढ़ावा भी दे सकता है, जिससे आखिर में अतिरिक्त ऊर्जा की खपत होती है।
अगर ऐसा महसूस होने पर मैं अपने शरीर की मदद न करूं, तो क्या हो सकता है?
सूजन-संबंधी प्रतिक्रिया बहुत अधिक होने को ऐसी कई चीज़ों की नींव माना गया है जो खराब स्वास्थ्य का कारण बन सकती हैं। सूजन-संबंधी प्रतिक्रिया बहुत अधिक होने को दर्द के कुछ पैटर्न का कारण भी माना गया है।
कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि अधिक मात्रा में ऊर्जा का उत्पादन न कर पाने के कारण ही अवसाद के लक्षण उभरते हैं। बैक्टीरिया या वायरस जैसे रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता में कमी का संबंध भी ऊर्जा का उत्पादन करने की क्षमता में कमी से हो सकता है।
दीर्घकालिक तनाव शब्द का उपयोग लंबी अवधि (6 महीने से अधिक) से बढ़े हुए कॉर्टिसोल के लिए किया जाता है। इससे अधिक समय तक इस हार्मोन का बढ़ना शरीर के उन हिस्सों को नुकसान पहुंचाना/असंवेदी बनाना शुरू कर सकता है जो तनाव प्रबंधन करते हैं। वैज्ञानिकों ने विचार रखा है कि एड्रिनल ग्रंथियां अक्रियाशील हो सकती हैं, जिससे लंबे समय तक कॉर्टिसोल के उत्पादन में कमी और ऊर्जा की अत्यधिक कमी हो सकती है।
कम ऊर्जा महसूस होने पर मैं अपने शरीर की मदद करने के लिए जीवन शैली में क्या बदलाव कर सकता हूं?
यह बात उल्टी लग सकती है, लेकिन कम तीव्रता वाला व्यायाम ऊर्जा उत्पादन को उत्तेजित कर सकता है। सघन पोषक तत्वों (साबुत खाद्य पदार्थ और आहार में विविधता का खयाल रखें) वाले आहार शरीर को उच्चतम गुणवत्ता वाली ऊर्जा देते हैं। नाश्ते में शर्करा युक्त अनाज के बजाय चिकन खाने से शरीर को अधिक और बेहतर गुणवत्ता वाली ऊर्जा मिल सकती है। सही मात्रा में ऊर्जा के उत्पादन के लिए अपने प्राकृतिक सर्केडियन रिदम का ध्यान रखना बेहद महत्वपूर्ण है। नींद की अच्छी गुणवत्ता और अवधि मायने रखती है और नींद से जुड़ी अच्छी आदतें इसमें सहायक हो सकती हैं। इनमें एक अंधेरे कमरे में सोना, सोने जाने से पहले इलेक्ट्रॉनिक्स इस्तेमाल न करना और रात 11 बजे से पहले सोने जाना शामिल हैं।
ऊर्जा के सही स्तर को बढ़ावा देने के लिए पूरक
हमारे “नए सामान्य” घर-से-काम शेड्यूल में हमें अपनी उम्मीद से अधिक कॉफी की ज़रूरत महसूस हो सकती है, लेकिन फिर से चुस्ती-फूर्ति जगाने के लिए शरीर के प्राकृतिक ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना सबसे अच्छा तरीका है।
कोक्यू10, अश्वगंधा, बी विटामिन, टायरोसिन, रोडियोला, विटामिन डी, सिट्रुलीन, मेलाटोनिन, मैग्नीशियमऔर हरी सब्जियों के मिश्रण समेत कई पूरक ऊर्जा को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
1. कोक्यू10
कोक्यू10 को क्विनन नामक एक रासायनिक यौगिक के रूप में जाना जाता है। कोक्यू10 बैक्टीरिया से लेकर मनुष्यों तक सभी जीवों में प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होता है। यह आवश्यक पोषक तत्व माइटोकॉन्ड्रिया में ऊर्जा उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण होता है।
यह आरओएस से माइटोकॉन्ड्रिया को होने वाले किसी भी नुकसान को कम करने में भी मदद करता है। असल में, कोक्यू10 शरीर में हमारे ऊर्जा के मुख्य स्रोत की रक्षा करता है।
2. अश्वगंधा
अश्वगंधा, जिसे इसके लैटिन नाम विथानिया सोम्निफ़ेरा के नाम से भी जाना जाता है, एडैप्टोजेन की श्रेणी में आने वाली एक जानी-मानी जड़ी-बूटी है।
एडैप्टोजेनिक जड़ी-बूटियां शरीर में कॉर्टिसोल, यानी हमारे तनाव हार्मोन, के स्तर को सही रखने में मदद करती हैं। यह जड़ी-बूटी सूजन-संबंधी प्रतिक्रिया को सही रखने में मदद कर सकती है जिससे शरीर में ऊर्जा की बचत हो सकती है। इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण हमारे माइटोकॉन्ड्रिया को नुकसान से बचाने में मदद कर सकते हैं।
3. बी विटामिन
बी विटामिन पानी में घुलनशील विटामिनों का एक वर्ग है जो शरीर की कई रासायनिक प्रतिक्रियाओं के लिए सहकारकों, यानी आवश्यक तत्वों, के रूप में काम करता है। माइटोकॉन्ड्रिया को ऊर्जा बनाने के लिए कई बी विटामिनों की आवश्यकता होती है। अन्य बी विटामिन, जैसे बी 6, न्यूरोट्रांसमीटर उत्पादन के स्तर को सही रखते हैं, जिससे ऊर्जा की बचत होती है।
ऐसा भी माना गया है कि बी विटामिन आरओएस से बचाने में मदद करते हैं, जिससे हमारा माइटोकॉन्ड्रिया स्वस्थ रहता है।
4. टायरोसिन
टायरोसिन एक गैर-आवश्यक अमीनो एसिड है जो फ़ीनायलएलनिन नामक एक अन्य अमीनो एसिड से बनता है। यह यौगिक न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर को सही रखने के लिए महत्वपूर्ण होता है, जिससे ऊर्जा की बचत होती है।
माइटोकॉन्ड्रिया के अंदर ऊर्जा उत्पादन में भी टायरोसिन एक मुख्य कारक है। इसलिए, इसके बिना ऊर्जा उत्पादन की कुशलता में कमी आ सकती है।
5. रोडियोला
रोडियोला या रोडियोला रोसिया, अश्वगंधा जैसी एक एडैप्टोजेनिक जड़ी-बूटी है, लेकिन इसमें खुद के अनूठे गुण हैं।
यह जड़ी-बूटी कॉर्टिसोल उत्पादन के स्तर को सही रखने में मदद करके सोचने-समझने की क्षमता और ऊर्जा उत्पादन को स्वस्थ रखने में सहायता कर सकती है। यह मानसिक थकान से होने वाले “ऊर्जा के ह्रास” को भी रोक सकती है क्योंकि यह ध्यान और एकाग्रता को बढ़ावा देती है।
6. विटामिन डी
विटामिन डी ऊर्जा उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। हमारी त्वचा के पराबैंगनी प्रकाश के संपर्क में आने से यह प्राकृतिक रूप से शरीर में बनता है। आधुनिक दुनिया में घर के अंदर रहने और सूरज से बचने की आदतें लोकप्रिय होने से कई लोगों में इस आवश्यक विटामिन की कमी हो सकती है।
विटामिन डी हमारे भोजन को ऊर्जा में तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह खासकर शर्करा के टूटने को सही बनाए रख सकता है, जिससे अनुमान है कि शरीर में सूजन-संबंधी प्रतिक्रिया सही रहती है।
7. सिट्रुलीन
सिट्रुलीन एक अमीनो एसिड है जिसे शरीर बना सकता है या तरबूज जैसे खाद्य पदार्थों के माध्यम से लिया जा सकता है। यह यौगिक कोशिका में ऊर्जा उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यह अमीनो एसिड उन अणुओं का उत्पादन करने में मदद करता है जो माइटोकॉन्ड्रिया में ऊर्जा के लिए सीधे इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
8. मेलाटोनिन
मेलाटोनिन निद्रा चक्र को स्वस्थ रखने की क्षमता के लिए जाना जाता है, जो ऊर्जा उत्पादन का एक प्रमुख तत्व है।
मेलाटोनिन ऊर्जा के लिए शर्करा को तोड़ने के समय और स्थान को नियंत्रित करके ऊर्जा उत्पादन पर सीधा प्रभाव डालता है। यह इस बात को नियंत्रित करने में भी भूमिका निभाता है कि इस शर्करा को कितनी तेज़ी से या धीमे से तोड़ा जाना चाहिए। माना जाता है कि मेलाटोनिन रक्तप्रवाह में शर्करा के स्तर को भी सही रखता है, जिससे सूजन-संबंधी प्रतिक्रिया सही रहती है।
9. मैग्नीशियम
मानव शरीर में मैग्नीशियम के 300 से अधिक काम हैं। यह प्रचुर खनिज एक काउंटर आयन के रूप में काम करके माइटोकॉन्ड्रिया के माध्यम से ऊर्जा के परिवहन में मदद करता है, यानी यह संतुलित करता है कि ऊर्जा उत्पादन करने वाले इस अंगक के अंदर क्या आएगा और बाहर क्या जाएगा।
यह माइटोकॉन्ड्रिया से ऊर्जा को स्थानांतरित करने के लिए बहुत आवश्यक है ताकि शरीर की सभी कोशिकाएं उसका उपयोग कर सकें।
10. हरी सब्जियों के मिश्रण
हरी सब्जियों के मिश्रण, या सुपरफूड के मिश्रण, अक्सर पाउडर के रूप में पाए जाते हैं और उन्हें स्मूदी या अन्य खाद्य पदार्थों में पोषक तत्व बढ़ाने के लिए डाला जा सकता है। सघन पोषक तत्वों वाली सब्जियों जैसे कि केल, चुकंदर, पालक और अन्य सब्जियों के ये सूखे मिश्रण माइटोकॉन्ड्रिया को होने वाली क्षति को रोकने के लिए एंटीऑक्सीडेंट या ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मैग्नीशियम या विटामिनों जैसे आवश्यक पोषक तत्व प्रदान कर सकते हैं।
शरीर में ऊर्जा उत्पादन हर काम के लिए आवश्यक है। शुक्र है, इस प्रक्रिया में मदद के लिए जीवन शैली और पूरक से जुड़े सुझाव उपलब्ध हैं।
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