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प्रतिकार प्रणाली को शक्तिशाली बनाने के लिए शीर्ष 10 प्राकृतिक पूरक तत्त्व

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यह प्रतिकार प्रणाली एक जटिल प्रणाली है, जो हानिकारक विषाणुओं, जीवाणुओं, परजीवी और फफूंद से शरीर को बचाने में सहायता करती है। अंतर्निर्मित और समायोजनात्मक इन दो प्रकारों में विभाजित इस जटिल प्रणाली को पूरक तथा विरोधी कृमियों में निरंतर अंतर करते रहना होता है।  

अंतर्निमित प्रतिकार प्रणाली के कई कार्य होते हैं। उसके मुख्य कार्यों में से एक है संक्रमण अधिक बिगड़ने से निपटने के लिए शरीर के भीतर दृष्ट अथवा वास्तविक ख़तरों के क्षेत्रों को प्रतिकारक कोशिकायें भेजना। यह आक्रामक सेना के विरुद्ध पथक भेजने वाले सेनापति के समान है। अंतर्निमित प्रतिकार प्रणाली भी प्रतिकारक सुरक्षा के दूसरे भाग, समायोजनात्मक प्रतिकार प्रणाली को संप्रेरित करने में भी सहायता करता है। 

“प्राप्त प्रतिकार प्रणाली” के नाम से जानेवाली समायोजनात्मक प्रतिकार प्रणाली वह आधार है, जिसके सहारे टीकाकरण काम करते हैं और आपको स्पष्ट होता है कि आप संक्रमण से कैसे बच सकते हैं। इस अर्थ से, समायोजनात्मक प्रतिकार प्रणाली घर पर होनेवाले संभावित आक्रमण की भॉंति कृमियों के आक्रमण की “अग्रिम चेतावनी” देने में सहायता करता है, ताकि विपदा टालने के लिए आवश्यक सावधानियॉं बरती जा सकें।  


अंतर्निर्मित प्रतिकार प्रणाली  की कोशिकायें , जो सुरक्षा की पहली पंक्ति होती है, इसमें निम्नलिखित का समावेश होता है: बैसोफिल्स, डेंड्रिटिक कोशिकायें, योसिनोफिल्स, मैक्रोफेजेस, मास्ट कोशिकायें, न्यूट्रोफिल्स और प्राकृतिक विनाशक कोशिकायें।  

समायोजनात्मक  प्रतिकार प्रणाली  को प्राप्त प्रतिकार प्रणाली भी कहते हैं। समायोजनात्मक प्रतिकार प्रणाली की कोशिकाओं में बी कोशिकायें और टी कोशिकायें समाविष्ट होती हैं। 

स्वस्थ आहार, पर्याप्त निद्रा, नियमित व्यायाम तथा तनाव में कमी लाना वह महत्त्वपूर्ण जीवनशैली चुनाव हैं, जिनके द्वारा हम उच्च स्तर पर प्रतिकार प्रणाली के कार्य करने में सहायता कर सकते हैं। स्वस्थ जीवनशैली स्वभावों का स्थान कोई भी दवाई या पूरण नहीं ले सकता।  

तथापि, इसका प्रमाण है कि कुछ पूरक तत्त्व, विटामिन, वनस्पति तथा एडोप्टैजन अपनी प्रतिकार प्रणाली को शक्तिशाली बनाने की इच्छा रखनेवाले व्यक्तियों के लिए अतिरिक्त सहायता उपलब्ध करा सकते हैं, जब जीवनशैली चुनाव पर्याप्त न हों।  

नैक

 एन-एसिटेल l-सिस्टीन (नैक) , ग्लूटाथियोन का  प्रतिगामी तथा एक संभावित एंटी-ऑक्सिडेंट है। प्राकृतिक रूप से उत्पादित होनेवाले एमिनो एसिड,  एल-सिस्टीन का वह अवशिष्ट है । ग्लूटाथियोन मानवों, पशुओं, वनस्पतियों तथा फफूंद में पाया जाता है। यह ऑक्सिडेटिव हानि से कोशिकाओं को बचाने में सहायता करता है और प्रतिकारकता की रक्षा करने में भी सहायता करता है। अध्ययन 1 दिखाते हैं कि उच्च स्तर में ग्लूटाथियोन होने से बीमारी और संक्रमण का ख़तरा, विशेषकर वृद्ध व्यक्तियों में कम होता है।  

अध्ययन 2 से यह भी ज्ञात होता है कि ग्लूटाथियोन हमारी श्वेत रक्त कोशिकाओं या लिंफ़ोसाइट्स को संक्रमण से लड़ने में सहायता करने के लिए सुसज्ज करने में सहायता करने में महत्त्वपूर्ण होता है। 2011 के अध्ययन 3 में पाया गया कि रक्त में ग्लूटाथियोन का स्तर कम होने से निम्नलिखित परिस्थितियॉं निर्माण हो सकती हैं। रक्त में ग्लूटाथियोन का स्तर अधिक होने से संक्रमण से लड़ने में सहायता हो सकती है।  

  • इंजरी/एक्यूट रिस्पेरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम 
  • क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस 
  • क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मनरी डिसीज़ 
  • विविध जीवाणुजनित और विषाणुजनित संक्रमण  

ज़िंक 

न्यूट्रिशन की जर्नल के अनुसार, लगभग 45 प्रतिशत अमरीकियों में आहार में ज़िंक पर्याप्त मात्रा में नहीं लिया  जाता है , और जो शरीर में 300 से अधिक जैवरासायनिक प्रतिक्रियाओं के लिए महत्त्वपूर्ण होता है। विश्वभर में, 15 प्रतिशत से अधिक लोकों को ज़िंक की कमी होती है 4

आयु बढ़ने के साथ, ज़िंक जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के अवशोषण पर प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही, आहार में ज़िंक का समावेश रखनेवाले खाद्यपदार्थों की कमी और नियमित रूप से अल्कोहल लेने से ज़िंक का स्तर बहुत ही कम होने जैसा परिणाम भी हो सकता है। पोषक तत्त्वों पर 2018 में किए गए अध्ययन के अनुसार ज़िंक की कमी का संबंध संक्रमण तथा स्वयं प्रतिकार परिस्थितियों का ख़तरा बढ़ने से है5.

2016 के अध्ययन 7 ने दर्शाया कि ज़िंक की प्रतिकार प्रणाली कोशिकाओं के आपसी संवाद में सहायता करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। 2017 में पोषक तत्त्वों पर किए गए अध्ययन से 8 अंतर्निर्मित और समायोजनात्मक दोनों प्रतिकार प्रणालियों की संभाल करने में होनेवाली महत्त्वपूर्ण भूमिका सामने आई।  

शिफारिश मात्रा: ज़िंक लोज़ेंजेस, लेबल में निर्देश किए अनुसार 30 mg। ज़िंक के अन्य फ़ार्मूला भी स्वीकार्य हैं, जिन्हें लेबल में निर्देश किए अनुसार लिया जा सकता है। ज़िंक अधिकतर  मल्टीविटामिंस में भी पाया जाता है । 

विटामिन सी 

विटामिन सी, जिसे एस्कोर्बिक एसिड या एस्कोर्बेट भी कहा जाता है, पिछले 50 वर्षों से सबसे अधिक अध्ययन किए गए विटामिनों में से एक रहा है। अनुसंधान दिखाता है कि विटामिन सी एक शक्तिशाली प्रतिकार प्रणाली बनाने में सहायता करने में सक्षम है, और भी कई लाभ हैं।  

ऐसा व्यक्ति, जिसे विटामिन सी की कमी हो, उसकी प्रतिकार प्रतिक्रिया अशक्त होती है, जैसा कि पोषक तत्त्वों पर 2019 में किए अध्ययन से सामने आया है 11 अधिकतम लोगो के लिए सूचित मात्रा: 500 से 2,000 mg प्रतिदिन। 

रेइशि मशरूम  

रेइशि  मशरूम  (गैंडोर्मा ल्यूसिडम और लिंगची) पूर्वी औषधियों में उपयोग में लाई जानेवाली एक फफूंद है। यह सामान्य रूप से एशिया के गर्म और आर्द्र इलाकों में उगाई जाती है। मशरूम को खाद्य, पाउडर या पूरक तत्त्व के रूप में लिया जा सकता है और माना जाता है कि उससे प्रतिकार प्रणाली संप्रेरित हो सकती है।  

2003 में किए गए अध्ययन ने दिखाया कि रेइशि मशरूम प्राकृतिक विनाशक कोशिकाओं की गतिविधि बढ़ाने में सहायता कर सकता है, जिससे विषाणु मारे जा सकते हैं। 2008 में किया गया एक अध्ययन 12 दिखाता है कि मशरूम भी टी कोशिका के कार्य में सहायता कर सकते हैं। अंततः, 2019 में वैज्ञानिक ब्यौरों पर किए गए एक अध्ययन 13 में सामने आया कि रेइशि मशरूम के सक्रिय घटक की गतिविधि विषाणुरोधी होती है। सूचित मात्रा: लेबल में निर्देशित किए अनुसार। 

ओमेगा-3 फैटी एसिड 

ओमेगा-3 फैटी एसिड , जिन्हें पॉलिसैचुरेटेड फैटी एसिड या प्यूफ़ा भी कहते हैं, मानवीय स्वास्थ्य में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें मुख्य और विशेष रूप से एइकोसैपेंटाइनिक एसिड(ईपीए) और डोकोसाहेक्साइनिक एसिड(डीएचए) का समावेश होता है, माना जाता है कि सर्वांगीण स्वास्थ्य में उनके कई लाभ होते हैं, जिनमें प्रतिकार प्रणाली शक्तिशाली करना भी शामिल होता है। 

न्यूट्रीशन जर्नल में 2014 में किए एक अध्ययन 14 में सामने आया कि अधिकतर लोग अपने आहार में पर्याप्त आवश्यक फैटी एसिड शामिल नहीं करते हैं। यह दुर्भाग्यशाली है क्योंकि अन्य अध्ययन उनके प्रतिकार प्रणाली के लाभ नहीं दिखाते। 

 2019 में किए एक अध्ययन 15 में चर्चा है कि कैसे ओमेगा-3 समायोजनात्मक और अंतर्निर्मित प्रतिकार प्रणाली कोशिकाओं दोनों को सशक्त करने में भूमिका निभा सकते हैं। 2017 के अध्ययन 16 ने दिखाया कि कैसे मैक्रोफेज- संक्रमण से लड़नेवाली कोशिकाओं से लड़ने में वे महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जबकि 2012 के अध्ययन 17 ने दिखाया कि ओमेगा -3 मैक्रोफेज को रोगकारक जीवाणु खाने में सहायता कर सकते हैं।  

ओमेगा-3 फैटी एसिड विविध आहार स्त्रोतों में पाए जाते हैं, जिनमें मछली(मैकरेल, कॉड और सैल्मन में सबसे अधिक मात्रा में),  काजू चिया के बीजअलसी के बीज पोस्ता के बीज, ऐवेकाडो, और नैटो में पाया जाता है। सूचित मात्रा: दिन में एक या दो बार 1,000 से 2,000 mg।  

प्रोबायोटिक 

प्रोबायोटिक लाभकारी जीवाणु होते हैं, जो न केवल अमाशय के स्वास्थ्य, बल्कि सर्वांगीण स्वास्थ्य और कल्याण में सहायता कर सकते हैं। हमारी प्रतिकार प्रणाली का अस्सी प्रतिशत हमारी ऑंतों में होता है, जिससे इस प्रश्न का उत्तर मिलता है कि लाभकारी जीवाणु क्यों हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायता करते हैं। कल्चर्ड खाद्य जैसे योगर्ट, केफिर,  कोंबूचा लेने पर विचार किया जाना चाहिए। पर्याप्त न हो, तो प्रोबायोटिक पूरक तत्त्व उपयोगी होते हैं।  

प्रोबायोटिक हमारी प्रतिकार क्षमता का नियामन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 2009 में किए गए एक अध्ययन 18 में दर्शाया गया कि, “प्रोबायोटिक्स का आरटीआइ(श्वसनतंत्र मार्गिका संक्रमण) के लक्षणों की गंभीरता और अवधि पर लाभकारी प्रभाव हो सकता है, पर उससे ऐसा नहीं लगता कि आरटीआइ(के संक्रमणों) का प्रभाव कम हो जाएगा।” 

बच्चों पर 2017 पर किए गए एक अध्ययन 19 में भी लाभ दिखाया गया। अनुसंधानकर्ता के पद्धतिबद्ध अवलोकन से निष्कर्ष निकालने में सहायता मिली कि “लैक्टोबैसिलस रैम्नोसस का उपयोग थोड़े पैमाने पर श्वसनतंत्र मार्गिका के संक्रमणों की अवधि को कम कर सकता है।” 

अंततः, 2017 में पोषक तत्त्वों पर किए गए अध्ययन 20 में इंफ्ल्युएंज़ा टीकाकरण प्राप्त करनेवाले व्यक्तियों में प्रोबायोटिक्स और प्रिबायोटिक्स के उपयोग का मूल्यांकन किया गया। इस अध्ययन में 1,979 सहभागी शामिल थे। परिणामों से देखने को मिला कि जिन्होंने प्रोबायोटिक्स लिए और  प्रिबायोटिक्स  उनकी टीकाकरण के प्रति प्रतिकार प्रतिक्रिया बेहतर थी, जिसका अर्थ था कि उनकी प्रतिकार प्रतिक्रिया अधिक शक्तिशाली थी और बीमार पड़ने की संभावना कम थी। सूचित मात्रा: दिन में एक या दो बार 5 से 50 बिलियन इकाइयॉं। 

जिनसेंग  

पैनेक्स जिनसेंग  कई वैद्यकीय परिस्थितियों के लिए ली जाती है। इस वनस्पति का मूल कोरिया में है, और उसे 2,000 से अधिक वर्षों के लिए उपयोग किया जा रहा है। चीन और साइबेरिया के भी कुछ क्षेत्रों में उगाया जानेवाला पैनेक्स जिनसेंग अनूठा है- उसे अन्य ज्ञात गिन्सेंग, जैसे अमरीकी या साइबेरियाई जिनसेंग के साथ जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। पैनेक्स जिनसेंग को कोरियाई जिनसेंग, चीनी जिनसेंग या एशियाई जिनसेंग भी कहा जाता है।  

 पैनेक्स जिनसेंग के सक्रिय घटकों को जिनसेनोसाइड्स भी कहा जाता है।  

2015 के एक अध्ययन ने दिखाया कि जिनसेंग में “आरएसवी(रेस्पिरेटरी सिनिटिकल वाइरस) के विरुद्ध सुरक्षात्मक प्रभाव विविध यंत्रणाओं के माध्यम से हैं, जिसमें कोशिका के अस्तित्व में सुधार, विषाणु गुणाकार पर आंशिक नियंत्रण तथा साइटोकिन निर्माण में रूपांतर और फेंफड़ों में कई प्रकार की प्रतिकार कोशिकाओं का अंतरण सम्मिलित है।” 

जर्नल ऑफ़ गिन्सेंग रिसर्च में एक 2020 में किए गए एक जिनसेंग अध्ययन के अनुसार 21, जिनसेंग श्वसनतंत्र कोशिकाओं और मैक्रोफ़ेज द्वारा निर्मित दाहकारक साइटोकिंस (IFN-γ, TNF-α, IL-2, IL-4, IL-5, IL-6, IL-8) का स्तर कम करता है। आगे, वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला कि, “अधिकतर वैद्यकीय परीक्षणों से प्रकट हुआ कि गिन्सेंग, विविध मात्रा में, मौसमी प्रोफ़िलैक्सिस की एक सुरक्षित व प्रभावी पद्धति है, जो सर्दी और फ़्लू के लक्षणों में आराम देने और उनका ख़तरा और अवधि कम करने में सहायता करती है।” सूचित्र मात्राः लेबल में निर्देशित किए अनुसार। 

नोट: जब तक हमारे पास अधिक डेटा न हो, नीचे दिए गए पूरक तत्त्वों को सावधानी के साथ उपयोग किया जाना चाहिए, यदि किसी को “साइटोकिन स्टोर्म” का ख़तरा हो, जो कुछ शुरुवाती विषाणु संक्रमणों के दौरान हो सकता है। यह माना जाता है कि नीचे दिए गए पूरक तत्त्व साइटोकिंस IL-1B and IL-18 को बढ़ा सकते हैं, जो शुरुवाती रोग में एक अवांछित प्रभाव होता है।  

एकीनिया  

एकीनिया पर्पिया एक सदाबहार वनस्पति है, जो लगभग 2,000 वर्षों से उपयोग में लाया जा रहा है और उसका मूल उत्तर अमरीका के स्थानीय निवासियों में ढूंढा जा सकता है। एकीनिया वनस्पति में संभावित  एंटीऑक्सिडेंट गुणधर्म होते हैं और ऐतिहासिक रूप से श्वसनात्मक, मूत्रसंबंधी और त्वचासंबंधी संक्रमणों का उपचार करने में उसका उपयोग किया जा रहा है। इस वनस्पति को 22 दीर्घ काल के लिए वयस्कों और बच्चों दोनों पर प्रभावी माना गया है।  

जामा में 2015 में किए एक अध्ययन 23 में पाया गया कि सर्दी के निवारण में इसका कोई लाभ नहीं रहा, पर एकीनिया का उपयोग सामान्य सर्दी की अवधि कम करने में किया जा सकता है, जिससे अनुमान लगाया गया है कि वह विद्यमान संक्रमण से निपटने में प्रतिकार प्रणाली की सहायता कर सकता है। 

हॉलिस्टिक नर्स प्रैक्टिशनर  में प्रकाशित 2016 के एक अध्ययन 24 में पाया गया कि एकीनिया सामान्य सर्दी के निवारण में सहायता कर सकता है। अन्य अध्ययनों में भी तत्सम शोध देख गए हैं। एकीनिया को कई बार चाय, पूरक तत्त्व या किसी सार के रूप में लिया जाता है। लेबल में निर्देशित किए अनुसार लें।  

विटामिन डी  

दक्षिण कैलिफ़ोर्निया में जब मैं कार्यरत था, मैंने पाया कि 80 प्रतिशत रोगियों को विटामिन डी की कमी थी। उन इलाकों में जहाँ धूप कम निकलती है ऐसा होना अधिक आम है। ठण्ड के महीनों में, यह कमतरता बहुत सामान्य है। 

विटामिन डी  अंतर्निर्मित और समायोजनात्मक प्रतिकार प्रणाली के नियामन तथा पैथोजेंस के प्रति उनकी प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 2015 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार25, “विटामिन डी विटामिन डी रिसेप्टर(वीडीआर) के माध्यम से संकेत देता है, जो एक विशिष्ट जिंक फिंगर न्यूक्लियर रिपोर्टर होता है।”  

2018 में किए एक अध्ययन 26 ने गर्भावस्था में विटामिन डी माता के द्वारा लिए जाने के महत्त्व और भ्रूण की प्रतिकार प्रणाली विकसित करने में उसकी भूमिका को अधोरेखित किया। अनुसंधानकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला, “भ्रूण के विकास के दौरान विटामिन डी अनावरण नवजात की प्रतिकार प्रणाली को प्रभावित करता है, जो दमा से संबंधित सुरक्षा में भी योगदान दे सकता है, जिसमें शुरुवाती जीवन के संक्रामक परिणाम शामिल हैं,” 

विटामिन डी विषाणुरोधी कार्य भी करता है। अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरणीय अनुसंधान एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रपत्र में 2019 के एक अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला कि 27 जिन व्यक्तियों के रक्त में विटामिन डी का स्तर अधिक था, उन्हें ऐसे व्यक्तियों की तुलना में ऊपरी श्वसनतंत्र के संक्रमण का ख़तरा कम था, जिन व्यक्तियों के रक्त में विटामिन डी का स्तर कम था।  

अंततः, अमेरिकन गेट्रायटिक सोसायटी के प्रपत्र में 2017 के एक अध्ययन 28 ने वृद्ध व्यक्तियों में विटामिन डी की मानक मात्रा और उच्च मात्रा की तुलना की है। जिन्होंने विटामिन डी की अधिक मात्रा ली, उन्हें अन्य लोगों की तुलना में ऊपरी श्वसनतंत्र संक्रमण होने की 40 प्रतिशत कम संभावना थी। 

सूचित मात्रा: 1,000 से 5,000 IU सबसे सामान्य मात्रा है। जिसके खून में कैल्शियम बढ़ गया हो, उसे पूरण से पहले अपने चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।  

एल्डरबेरी 

एल्डरबेरी  (सैंबेकस एसपी.) एक फूल वाला पौधा, विश्वभर के स्थानीय लोगों द्वारा औषधीय उपयोग में लाया जा रहा है। हाल के वर्षों में, एल्डरबेरी की लोकप्रियता बहुत बढ़ गई है। ऐसा माना गया है कि उससे प्रतिकार प्रणाली बढ़ती है।  

2016 में किए गए एक अध्ययन से 29 पता चला कि एल्डरबेरी हवाई यात्रा करनेवालों में सर्दी के लक्षण कम कर सकती है, जबकि प्रकाशरसायनशास्त्र पर 2009 में किए गए अध्ययन से 30 पता चलता है कि एल्डरबेरी प्रसिद्ध इंफ्लूएंजारोधी प्रिस्क्रिप्शन औषधि ओसेल्टामाविर(टैमीफ़्लू) और एमेंटाडीन के समान ही कार्य करती है।  

साथ ही, 2014 में किए गए एक अध्ययन 31 से निष्कर्ष निकाला कि एल्डरबेरी एंफ्लूएंजा विषाणु से संक्रमित व्यक्तियों के लिए एक प्रभावी उपचार हो सकता है। सूचित मात्रा: लेबल में निर्देशित किए अनुसार। 

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